हासन (कर्नाटक) , जून 30 -- बुकर पुरस्कार विजेता कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक ने मंगलवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जतायी जा रही आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने खुद इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुभव ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है कि यह कवायद मतदाताओं को परेशान करने के लिए थी।
हासन जिले में अपने आवास से एसआईआर अभ्यास की शुरुआत पर प्रतिक्रिया करते हुए सुश्री मुश्ताक ने कहा कि राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की आलोचना के कारण उन्हें उम्मीद थी कि यह प्रक्रिया काफी जटिल और डराने वाली होगी।
लेखिका ने कहा, "नेताओं और कार्यकर्ताओं के बयानों से प्रभावित होकर, मैं यह मानने लगी थी कि एसआईआर अभ्यास का उद्देश्य नागरिकों को परेशान करना और उन्हें अनावश्यक कठिनाई में डालना था। मैं इस बात को लेकर चिंतित थी कि मुझे कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे और क्या यह पूरी प्रक्रिया बोझिल होगी।"सुश्री मुश्ताक ने उपायुक्त और जिला अधिकारियों की उपस्थिति में प्रगणन फॉर्म भरने के बाद कहा कि यह प्रक्रिया उनकी उम्मीदों के विपरीत सरल रही।
लेखिका ने कहा, "मुझे केवल अपना आधार कार्ड और मौजूदा मतदाता पहचान पत्र दिखाना पड़ा। केवल इन्हीं दस्तावेजों की आवश्यकता थी और पूरी प्रक्रिया सरल और आसान थी।" उन्होंने बताया कि भरे हुए प्रगणन फॉर्म की एक प्रति जिला प्रशासन के पास रहेगी जबकि दूसरी प्रति आवेदक के पास रहेगी। सुश्री मुश्ताक ने इस प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों से आग्रह किया कि वे महीने भर चलने वाले इस अभ्यास के दौरान हर नागरिक को इसी तरह की सहायता मिलना सुनिश्चित करें।
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