नयी दिल्ली , अक्टूबर 09 -- इंडिया गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपनी चिंताओं से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अवगत कराने के लिए शुक्रवार को संसद भवन से विजय चौक तक मार्च निकाला।
मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित गठबंधन के बड़ी संख्या में सांसद शामिल हुए। मार्च निकालकर राष्ट्रपति भवन की तरफ जा रहे सभी सांसदों को पुलिस ने विजय चौक पर रोक दिया।
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति से मिलने गठबंधन के 10 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन गया और बाकी सदस्य विजय चौक पर ही नारेबाजी करते रहे। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी विपक्ष की चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखा।
राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने से पहले इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बैठक की। बैठक में राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले ज्ञापन को अंतिम रूप दिया गया और विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। इसके बाद सांसद संसद भवन से विजय चौक की ओर रवाना हुए।
श्री खरगे ने मार्च में शामिल होने के दौरान कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने खुले तौर पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त श्री कुमार को उनकी गलतियों के बारे में समझाने की बात कही है, लेकिन इसके बावजूद वह नहीं माने। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद मोदी सरकार श्री कुमार को पद से हटाने के लिए तैयार नहीं है। विपक्ष कई वर्षों से चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएं सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने रख रहा है, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गयी। आजादी के बाद संविधान ने जनता को वोट देने का अधिकार दिया, लेकिन अब यह अधिकार छीने जाने का खतरा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार छोटी मछली हैं लेकिन उनके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उनकी सरकार है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के अधिकार छीनकर तानाशाही करना चाहती है। यदि तानाशाही आती है तो लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकार समाप्त हो जायेंगे। विपक्ष इनकी रक्षा के लिए लड़ रहा है।
श्री खरगे ने कहा कि विपक्ष राष्ट्रपति को बतायेगा कि सभी नेता जनता के वोट के अधिकार के कारण ही यहां तक पहुंचे हैं। यदि वोट देने का अधिकार छीन लिया गया तो देश में तानाशाही की स्थिति पैदा हो जायेगी।
इससे पहले संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में गठबंधन के नेताओं को संबोधित करते हुए श्री राहुल गांधी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त 1947 के ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया। उन्होंने नेहरू के भाषण के अंश उद्धृत करते हुए कहा कि वह भारत, पूरे एशिया और दुनिया के लिए एक निर्णायक क्षण था। स्वतंत्रता के साथ पूर्व में एक नया सितारा उदित हुआ और एक नयी आशा का जन्म हुआ। उन्होंने नेहरू की इस कामना का भी उल्लेख किया कि स्वतंत्रता का यह सितारा कभी अस्त न हो और लोगों की आशाएं कभी निराशा में न बदलें।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है।
बैठक में कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले, कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।
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