चित्रदुर्ग , फरवरी 02 -- मुरुगा मठ के पूर्व पीठाधीश मुरुगा शरणा एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। होसदुर्गा की एक अदालत में उनके खिलाफ मठ की संपत्तियों को अदालत के आदेश के उल्लंघन में बेचने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

यह शिकायत मुरुगा मठ प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री शिवयोगी कालसद द्वारा दायर की गई है। उल्लेखनीय है कि मठ के प्रशासन का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा इस समिति का गठन किया गया है। समिति ने यह कदम प्रकाश नामक व्यक्ति की शिकायत के बाद उठाया, जिसमें मठ की संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री का आरोप लगाया गया था।

याचिका के अनुसार, मुरुगाश्री पर न्यायालय द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है, जिनके तहत उन्हें मठ की संपत्तियों से जुड़े किसी भी लेनदेन से रोका गया था। इसके बावजूद, उन्होंने कथित रूप से होसदुर्गा निवासी श्री एम. मंजूनाथ के पक्ष में एक सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी कर दी, जिसके आधार पर मठ की चार आवासीय साइटें सुश्री ममता और सुश्री नलिनी नामक दो व्यक्तियों को बेच दी गईं।

प्रशासनिक समिति ने कहा कि ये लेनदेन अदालत के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना करते हुए किए गए। संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद समिति ने 30 जनवरी को औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने मामले का संज्ञान ले लिया है और आने वाले दिनों में आगे की कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है।

गौरतलब है कि मुरुगाश्री पहले से ही बच्चों के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो ) के तहत दर्ज एक अन्य मामले में मुख्य आरोपी हैं, जिसमें उनका ट्रायल चल रहा है। इसी मामले को देखते हुए अदालत ने पहले ही उन्हें मठ के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में भाग लेने से रोक दिया था।

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