मुरादाबाद , जुलाई 10 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की टास्क फोर्स लगातार सक्रिय है। जिला प्रशासन का दावा है कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना बाल विवाह की रोकथाम तथा बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में प्रभावी साबित हो रही हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने शुक्रवार को बताया कि प्रशासन का उद्देश्य जिले की प्रत्येक पात्र बच्ची तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उसे शिक्षा और सुरक्षित भविष्य से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी मदद मिल रही है।
संरक्षण अधिकारी शिवांगी शर्मा ने बताया कि विभाग की टास्क फोर्स जमीनी स्तर पर सक्रिय है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आर्थिक अभाव या सामाजिक दबाव के कारण किसी भी बच्ची का बचपन और उसकी शिक्षा प्रभावित न हो।
उन्होंने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन-1098, पुलिस हेल्पलाइन-112, जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के संयुक्त प्रयासों से सितंबर 2023 से अब तक जिले में होने जा रही 45 नाबालिग शादियों को समय रहते रुकवाया गया है।
जिला प्रशासन के अनुसार, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत अप्रैल 2019 से अब तक जिले की 32,300 से अधिक बेटियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा जारी रखने में सहायता मिली है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत जिले को 10,200 नए लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष 99.9 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल की गई है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म से लेकर स्नातक अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश तक छह चरणों में कुल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत माता-पिता को खो चुके बच्चों को प्रतिमाह चार हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना से जिले के 875 अनाथ एवं बेसहारा बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।
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