मुरादाबाद, सितंबर 26 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल में शनिवार सुबह से जारी तेज हवाओं और लगातार हो रही बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश और आंधी के बीच मुरादाबाद और रामपुर में करंट लगने से दो लोगों की मौत हो गई। मंडल मुख्यालय पर आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुरादाबाद के बंगला गांव सब्जी मंडी निवासी 25 वर्षीय अशोक (पिता श्यामी हलवाई) बारिश के दौरान भीगे हुए बिजली के खंभे की चपेट में आ जाने से उनकी जान चली गई। वहीं रामपुर के टांडा क्षेत्र स्थित 38 वर्षीय संविदा विद्युत कर्मी की शनिवार सुबह करीब 10-11 बजे बारिश के बीच विद्युत उपकेंद्र से शटडाउन लेकर केबल ठीक करने के दौरान अचानक जोरदार करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) टांडा ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लगातार बारिश और तेज हवाओं से अमरोहा, गजरौला और आसपास के क्षेत्रों में हजारों एकड़ धान और गन्ने की खड़ी फसल जमीन पर गिरकर तबाह हो गई है। पककर तैयार धान की फसल गिरने व जलभराव होने से कटाई और थ्रेशिंग का कार्य ठप हो गया है, जिससे सर्दियों की सब्जियों को भी भारी नुकसान की आशंका है।
मुरादाबाद के जिला कृषि अधिकारी डॉ. आरपी सिंह और अमरोहा के जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि बारिश थमने के बाद नुकसान का सटीक आकलन किया जाएगा।
मंडल के मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा और संभल के निचले इलाकों में जलभराव और बिजली आपूर्ति ठप होने से शनिवार को आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। मौसम विभाग द्वारा भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने कक्षा एक से 12वीं तक के सभी बोर्डों के विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। मौसम विभाग ने रविवार तक मेघगर्जन, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के साथ बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है।
दूसरी ओर, अमरोहा जनपद की मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र अंतर्गत दरबड़ ठेठ से शेरपुर के बीच अधूरे पड़े तटबंध के कारण खादर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। बसपा सरकार में 15 किलोमीटर लंबे इस तटबंध के लिए 30 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे और सपा सरकार में कार्य प्रारंभ भी हुआ था, लेकिन बिजनौर के दरबड़ ठेठ से पपसरी खादर के बीच पांच किलोमीटर हिस्से के लिए किसानों द्वारा भूमि देने से मना करने के कारण निर्माण अधर में लटक गया। वर्तमान में आधा किलोमीटर बिजनौर और साढ़े चार किलोमीटर अमरोहा क्षेत्र में काम अधूरा पड़ा है, जिसे पूरा करने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की धनराशि की मांग की जा रही है।
तटबंध का निर्माण न होने से पपसरी खादर, मोहसनपुर, सीपिया फार्म, पहाड़पुर, रसूलपुर भांवर, रसूलपुर एहतमली, शाहजहांपुर, शाहजहांपुर छात, मुकरामपुर, पट्टी खादर, रमपुरा खादर, इब्राहीमपुर, झुंडपुरा, आजमपुर, दांडी, सुल्तानपुर, बिसावली, चांदरा फार्म, शीशोवाली और आशुवाला सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की हजारों हेक्टेयर फसल हर साल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है। इस लगातार नुकसान और कर्ज के बोझ से परेशान होकर बूटा सिंह, करनैल सिंह, सुखदेव सिंह, सरवन सिंह और सुखवीर सिंह जैसे सिख समुदाय के कई किसान अपनी भूमि बेचकर उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
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