मुरादाबाद , सितंबर 08 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जिला चकबंदी अधिकारी (डीडीसी) के पेशकार सुभाष को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

पीड़ित किसान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ओमवीर सिंह ने मंगलवार को बताया कि यह रिश्वत जिला चकबंदी अधिकारी के नाम पर एक जमीन के मुकदमे में आदेश पर हस्ताक्षर करने के एवज में मांगी जा रही थी।

ओमवीर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि गणेश घाट तहसील क्षेत्र के गांव जगराम साठ में उनकी पैतृक जमीन स्थित है, जो उनके पिता के नाम पर दर्ज थी। पिता के निधन के बाद चारों भाइयों का नाम दर्ज होना था, लेकिन चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनका चक गलत स्थान पर लगा दिया गया, जो नदी की कटान में बह चुका था। इस मामले को लेकर जिला चकबंदी अधिकारी (डीडीसी) के न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की गई थी, जिसकी सुनवाई व बहस जून माह में ही पूरी हो चुकी थी और केवल अंतिम फैसला सुनाया जाना बाकी था।

पीड़ित किसान व अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि आदेश तैयार होने के बावजूद पिछले तीन महीनों से उन्हें न्यायालय के चक्कर लगवाए जा रहे थे। जब उन्होंने पेशकार सुभाष से संपर्क किया, तो उसने काम कराने के बदले पांच लाख रुपये की मांग की। बाद में बातचीत के दौरान 50 हजार रुपये पर सौदा तय हुआ। बताया कि पेशकार ने उन्हें तैयार आदेश पत्र तो दिखाया, लेकिन स्पष्ट कहा कि जब तक साहब के लिए तय रकम नहीं मिलेगी, तब तक इस पर हस्ताक्षर नहीं होंगे।

इसके बाद पीड़ित अधिवक्ता ने भ्रष्टाचार की इस पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली और एंटी करप्शन टीम में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही पीड़ित ने 50 हजार रुपये की रिश्वत पेशकार सुभाष को सौंपी, मौके पर मौजूद एंटी करप्शन की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ओमवीर सिंह ने मांग की है कि इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल जिला चकबंदी अधिकारी और संबंधित लेखपाल के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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