मुरादाबाद , अगस्त 08 -- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित मुरादाबाद का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) गंभीर कुपोषण के खिलाफ प्रभावी लड़ाई का उदाहरण बनकर उभरा है। केंद्र में गंभीर अति कुपोषित (सैम) बच्चों की रिकवरी दर वर्ष 2022 के 86 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई 2026 तक 95 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। बीते करीब साढ़े चार वर्षों में केंद्र में 1,148 बच्चों का उपचार किया गया है।
केंद्र की बढ़ती सफलता को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देश पर जिला अस्पताल में एनआरसी की क्षमता 10 से बढ़ाकर 20 बेड कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य अधिक संख्या में गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
एनआरसी में भर्ती बच्चों को एफ-75 और एफ-100 जैसी हाई-एनर्जी एवं हाई-प्रोटीन डाइट दी जाती है। इसके अलावा बच्चों के लिए सूजी का हलवा, दूध में देसी घी, वेजिटेबल सूप, फलों का रस और मूंग दाल की खिचड़ी जैसे पौष्टिक आहार की विशेष व्यवस्था की गई है। इस निर्धारित आहार एवं उपचार से औसतन 14 दिनों में अधिकांश बच्चे स्वस्थ हो जाते हैं और उनके वजन में करीब 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जाती है। जो बच्चे 14 दिन में निर्धारित मानकों के अनुसार स्वस्थ नहीं हो पाते, उन्हें 28 दिन तक केंद्र में रखकर उपचार दिया जाता है।
चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार, नोडल अधिकारी डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव और मेडिकल ऑफिसर डॉ. द्युति गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम बच्चों की 24 घंटे निगरानी करती है। बाल रोग विभाग में डीएनबी (पीजी) की पढ़ाई कर रहे छात्र-डॉक्टर भी सुबह और शाम बच्चों की जांच में सहयोग करते हैं। किसी बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल चिल्ड्रन वार्ड में स्थानांतरित करने की व्यवस्था भी है।
एनआरसी की सेवाओं का ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार करने की भी योजना बनाई गई है। ठाकुरद्वारा स्थित केंद्र की क्षमता चार से बढ़ाकर 10 बेड की जा रही है। इसके अलावा कांठ और बिलारी में 10-10 बेड के नए पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की कार्ययोजना पर काम चल रहा है।
केंद्र में भर्ती बच्चों के साथ रहने वाली माताओं को निशुल्क भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जाता है। उपचार के दौरान मजदूरी के नुकसान की भरपाई के लिए शासन की ओर से 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 1,400 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जाते हैं। बच्चों की छुट्टी के समय जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की पहल पर माताओं को 'पोषण पोटली' के रूप में डाइट किट भी दी जाती है।
बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ उनके मानसिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए केंद्र में विशेष प्ले एरिया बनाया गया है, जहां बच्चे उपचार के दौरान खेल और मनोरंजक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में एनआरसी में 197 बच्चे भर्ती हुए और रिकवरी दर 86 प्रतिशत रही। वर्ष 2023 में 299 बच्चों में 77 प्रतिशत, वर्ष 2024 में 279 बच्चों में 82 प्रतिशत और वर्ष 2025 में 225 बच्चों में 86 प्रतिशत रिकवरी दर दर्ज की गई। वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक 148 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें रिकवरी दर 90 प्रतिशत से अधिक रही है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि केंद्र का प्राथमिक लक्ष्य मुरादाबाद को कुपोषण मुक्त बनाना है। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार एनआरसी में 20 बेड की व्यवस्था संचालित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए बनाया गया प्ले एरिया भी उनके स्वास्थ्य लाभ में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में न्यूट्रीशनिस्ट और डाइटिशियन की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में मुरादाबाद एनआरसी में उपलब्ध विशेषज्ञ निगरानी, निर्धारित पोषण उपचार और माताओं को दी जा रही सहायता व्यवस्था कुपोषण से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित