बीजापुर , मई 27 -- छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी के सरेंडर नक्सली कमांडर हेमला विज्जा ने आज ये दावा किया है कि जुलाई 2025 में मुरदण्डा क्षेत्र में सीआरपीएफ पर किया गया सुनियोजित 'एम्बुश' हमला विफल होने के बाद नक्सली नेतृत्व को बड़ा मानसिक झटका लगा था, जिसके बाद संगठन के भीतर रणनीति बदलने और आत्मसमर्पण जैसे विचार उभरने लगे।

प्लाटून नंबर 9 और 10 का इंचार्ज रह चुके हेमला विज्जा ने 'वार्ता' से बातचीत के दौरान बताया कि 08 जुलाई 2025 को मुरदण्डा के पास बायगुड़ा जंगल में 229वीं वाहिनी सीआरपीएफ की लगभग 14 जवानों की आरएसओ ड्यूटी में लगी टुकड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया था। नक्सलियों का उद्देश्य जवानों को मारकर हथियार लूटना था।

उसने बताया कि घने जंगल, बड़े नाले और ऊंची-नीची जमीन का फायदा उठाते हुए तीन दिशाओं से घेराबंदी की गई थी। मुख्य हमलावर दस्ते में हेमला विज्जा के अलावा उधम सिंह, अरुण माड़कम, रायनुकुरषम और जयमान काडियम समेत कई कमांडर शामिल थे। उत्तर दिशा में वेल्ला मोडियम और आकाश हेमला की टीम तैनात थी, जबकि अन्य दस्तों को सहायता बल रोकने और पीछे से फायरिंग के लिए लगाया गया था। नक्सलियों के पास बीजीएल, आईईडी और भारी मात्रा में हथियार मौजूद थे।

हेमला विज्जा के अनुसार, जवानों के निशाने में आते ही नक्सलियों ने फायरिंग और आईईडी ब्लास्ट शुरू कर दिए, लेकिन सीआरपीएफ जवानों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की। इसी दौरान अतिरिक्त सहायता दल ने नक्सलियों की घेराबंदी को चकमा देते हुए पीछे से मोर्टार और हथियारों से हमला शुरू कर दिया, जिससे नक्सलियों में भगदड़ मच गई।

उसने कहा कि अचानक हुए जवाबी हमले से नक्सली दल असंतुलित हो गया और कई सदस्य नाले के रास्ते भाग निकले। इस दौरान नक्सली मरकम के घायल होने तथा वेल्ला मोडियम की टीम से संपर्क टूटने की भी जानकारी सामने आई।

हेमला विज्जा ने कहा कि सीआरपीएफ का सहायता दल मात्र 10 से 15 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गया, जिससे नक्सली हैरान रह गए। नक्सलियों ने जिस दिशा से सहायता बल आने की संभावना थी, वहां पहले से दस्ता तैनात किया था, लेकिन सहायता दल ने पीछे से पहुंचकर हमला कर दिया। उसने स्वीकार किया कि उनके अनुभव में सुरक्षा बल का सहायता दल इतनी तेजी से पहले कभी नहीं पहुंचा था।

उसने बताया कि पीछे से लगातार फायरिंग और जवानों की आवाजों से नक्सलियों को लगा कि बड़ी संख्या में बल पहुंच चुका है, जिसके बाद वे जंगल में भाग निकले।

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