कोंडागांव , अप्रैल 18 -- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में सकल जैन समाज के जैन मुनि वीरभद्र के व्याख्यान को सुनने के लिए शनिवार को जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में ओसवाल भवन पहुंचे।

इस दौरान मुनि वीरभद्र जी ने अपने तप, संयम और जीवनशैली को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा की।

जैन मुनि ने कहा कि उन्होंने 175 दिनों का कठोर तप - किया, लेकिन वे इससे अधिक तप नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनके मन में अहंकार न आ जाए।

उन्होंने बताया कि तप केवल शरीर का नहीं, बल्कि मन का भी होता है,मन पर नियंत्रण ही सच्ची साधना है। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति तप कर सकता है, बस इसके लिए आत्मसंयम और दृढ़ संकल्प जरूरी है मुनि श्री ने कहा कि सूर्य उदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही भोजन और जल ग्रहण करना चाहिए, इससे शरीर स्वस्थ रहता है और अनेक बीमारियों से बचाव होता है।

उन्होंने युवा पीढ़ी की जीवनशैली पर चिंता जताते कहा कि आज की युवा पीढ़ी की जीवन शैली के लिए मोबाइल आज सबसे बड़ा घातक होते जा रहा है जो युवा पीढ़ी को समाज से धर्म से परिवार से दूर कर रहा हैदूसरे सबसे अधिक कठोर तप करने वाले जैन मुनि वीरभद्र जी ने कहा कि यूट्यूब, फेसबुक और व्हाट्सएप का अत्यधिक उपयोग बच्चों के व्यवहारिक ज्ञान को कमजोर कर रहा है।

उन्होंने कहा कि बच्चे धीरे-धीरे सामाजिक और पारिवारिक संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर निगरानी रखें, विशेषकर रात के समय मोबाइल उपयोग को सीमित करें। मुनि वीरभद्र जी ने अंत में कहा कि तकनीक आवश्यक है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग ही जीवन को सही दिशा दे सकता है।

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