नयी दिल्ली , मार्च 17 -- सरकार ने मंगलवार को बताया कि मुद्रा योजना में पिछले तीन साल में कुल 15.50 लाख करोड़ रुपये के ऋण दिये गये हैं और गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) का अनुपात कुल दिये गये ऋण के 2.3 प्रतिशत के आसपास है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मुद्रा योजना के तहत मुख्य रूप से तीन श्रेणियां हैं - शिशु, किशोर और तरुण। तीनों योजनाओं को मिलाकर कुल एनपीए लगभग 2.3 प्रतिशत के आसपास है।
विशेषकर शिशु श्रेणी में एनपीए के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस श्रेणी में एनपीए कुल दिये गये ऋण के 1.83 प्रतिशत के आसपास है। उन्होंने कहा, "शिशु यदि श्रेणीवार मैं विशिष्ट एनपीए की बात करूं तो इसका एनपीए अपेक्षाकृत कम है।"उन्होंने बताया कि शिशु श्रेणी में पहली बार ऋण लेने वालों को वित्तीय मदद दी जाती है जो बहुत ज्यादा नहीं होता। तो ऐसा नहीं है कि एनपीए बहुत ज्यादा है, या यह काफी बड़ा हिस्सा है और इसलिए हमें व्यापक स्तर पर कार्रवाई करनी होगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना में ऋण लेने वाले ज्यादातर लोग बैंक के आसपास के ही होते हैं, और इसलिए बैंक उनसे नियमित संपर्क में हैं।
मूल प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि अप्रैल 2022 से मार्च 2025 के बीच कुल 18.37 करोड़ खातों में 15.50 लाख करोड़ के ऋण जारी किये गये हैं। इसमें शिशु श्रेणी में 3.96 लाख करोड़, किशोर में 7.52 लाख करोड़, तरुण में 3.98 लाख करोड़ और तरुण प्लस में चार हजार करोड़ रुपये के ऋण जारी किये गये हैं। करीब 19 प्रतिशत ऋण नये उद्यमियों को और 65 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिये गये हैं।
लिखित उत्तर में 31 मार्च 2025 के आंकड़ों में कहा गया है कि शिशु श्रेणी में एनपीए 1.50 प्रतिशत, किशोर में 2.49 प्रतिशत और तरुण में 2.10 प्रतिशत है। अक्टूबर 2024 में शुरू किये गये तरुण प्लस में एनपीए 0.29 प्रतिशत है।
एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में मुद्रा योजना के तहत एनपीए या अन्यथा बकाया की जानकारी देते हुए श्रीमती सीतारमण ने बताया कि शिशु श्रेणी में 12.4 प्रतिशत, किशोर में 9.48 प्रतिशत और तरुण में 7.92 प्रतिशत बैंकों का बकाया है। उन्होंने बताया कि बैंक बकाया ऋण की वसूली के लिए प्रयास कर रहे हैं।
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