....विद्या शंकर राय से....लखनऊ , सितंबर 10 -- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे मोहनलाल गंज संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार में बैठे लोग उन्हें पार्टी से निकलवाने की साजिश रच रहे हैं और ऐसी परिस्थितियां बनायी जा रही हैं कि वह ख़ुद पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर हो जायें। ऐसे लोग आने वाले चुनाव में पार्टी का भारी नुकसान करेंगे, जिसका ख़ामियाज़ा पूरी सबको भुगतना पड़ेगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि पार्टी और सरकार के भीतर कुछ लोग हैं, जिनको उनका कद और उनकी लोकप्रियता रास नहीं आ रही है। इसलिए वे लोग उनके ख़िलाफ़ लगातार दुष्प्रचार कर रहे हैं। उनकी मंशा है कि वह छोड़कर चले जायें।
श्री किशोर से यह पूछे जाने पर कि आप पार्टी से इतने नाराज़ क्यों हैं, उन्होंने कहा, " हमने पार्टी को अपना बहुमूल्य समय और योगदान दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और उनकी विचारधारा से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़े थे। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने काफ़ी मेहनत से भाजपा को खड़ा किया है। इसी का नतीजा था कि हमने अपनी संसदीय सीट की सभी विधानसभा सीटें जीताकर पार्टी के खाते में डालने का काम किया था।"श्री किशोर से यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें पार्टी के भीतर ही अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है, उन्होंने कहा, " बिल्कुल मेरी उपेक्षा की जा रही है। सही बात कहने की सजा दी जा रही है। पार्टी के कार्यक्रमों में बुलाया नहीं जाता। कोई कार्यक्रम करता हूं, तो पार्टी के नेताओं को आने से रोक दिया जाता है। ऐसे में अपने आत्मसम्मान की बची खुची लड़ाई लड़ रहा हूं। मैंने अपनी मंशा से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है। अभी मुझे इंतजार करने के लिए बोला गया है। आगे जैसी परिस्थितियां बनेंगी, वैसा कदम उठाएंगे।"दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज से पूर्व भाजपा सांसद कौशल किशोर की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नयी चर्चा छेड़ दी थी। इस पोस्ट के बाद ही ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
श्री किशोर ने अपनी पोस्ट में लिखा था, " गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गयी और अब नीचे आ रही है, और नीचे आने की गति को कोई कम नहीं कर सकता।"इस पोस्ट के साथ ही उन्होंने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये हैं। उनका कहना है कि जब कोई संगठन अपने सिद्धांतों और विचारधारा से भटक जाता है, तो विचारधारा से जुड़े लोगों का विश्वास टूट जाता है।
श्री किशोर ने कहा, " पार्टी के लिए अच्छा सोचने का हक शायद हमें नहीं है, इसीलिए हमें उसी निगाह से देखा जाता है। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं किया, तो 2027 में भी वही हश्र होगा जो 2024 में हुआ था।"पार्टी छोड़कर जाने की अटकलों को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, " अभी तक इस पर विचार नहीं किया है । मैं केवल एक ही विचारधारा से जुड़ा हूं और वह है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की नीतियां। कुछ साल पहले मैं जब भाजपा में आया था, उस समय भी हमने सार्वजनिक तौर पर कार्यकर्ताओं से अपने फैसले को लेकर सुझाव मांगे थे। सबकी राय के बाद ही हम भाजपा में शामिल हुए थे। वैसे ही भाजपा छोड़ने से पहले कार्यकर्ताओं के बीच जाऊंगा और उनसे विचार विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।"श्री किशोर ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 13 सितंबर को "आत्मसम्मान सम्मेलन" बुलाया है। यह कार्यक्रम प्रेरणा स्थल पर आयोजित होगा, जिसमें पूरे उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से उनके समर्थक लखनऊ आएंगे।
एक तरह से इस कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। सबकी निगाहें इस सम्मेलन पर टिकी हुई हैं। शायद इस दिन श्री किशोर भविष्य की राजनीति को लेकर कोई बड़ा एलान कर सकते हैं।
श्री किशोर ने आरोप लगाया है कि सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं और आम जनता की सुनवाई थानों और तहसीलों में नहीं हो रही है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार गिर रहा है।
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