मुजफ्फरपुर , अप्रैल 27 -- बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड बिहार सरकार का सेवानिवृत्त सांख्यिकी अधिकारी प्रियरंजन शर्मा है।
साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पटना के राजीव नगर स्थित आवास से प्रियरंजन शर्मा और उसके बेटे अनंत अमीष को गिरफ्तार किया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह में आरोपी की पत्नी भी शामिल थी। पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 23,900 रुपए नकद, एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, 19 बैंक पासबुक और चेकबुक, चार मोहर, एक पेन ड्राइव समेत कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास एफसीआरए से जुड़े चार बैंक खाते थे, जिनमें विदेश से करीब 200 करोड़ रुपए तक के संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले हैं।
साइबर पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)और टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाते थे। इसी तरीके से काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक के रिटायर्ड अधिकारी महेश गामी से 67 लाख रुपए की ठगी की गई थी। इस मामले में नौ अप्रैल को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने 12 दिनों तक लगातार कॉल कर पीड़ित को डराया और फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर रकम ट्रांसफर करवा ली। वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी)के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का गहन विश्लेषण कर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के खिलाफ देश के 28 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। आरोपी फर्जी कंपनियों और एनजीओ के नाम पर बैंक खाते खोलकर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे, जिससे उसका स्रोत छिपाया जा सके। एक दिन में करीब चार करोड़ रुपए तक के लेनदेन की बात भी सामने आई है।
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