पटना , जुलाई 25 -- ाज्य के मुजफ्फरपुर में संचालित जीविका बैग क्लस्टर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका सृजन और उद्यमिता विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। जीविका समूह की महिलाएं सफलतापूर्वक एक फैक्ट्री का भी संचालन कर सकती हैं और अन्य कई आम महिलाओं को भी रोजगार दे सकती हैं। यह क्लस्टर एक सफल उद्मिता का सराहनीय उदाहरण के तौर पर सामने आया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की ओर से संचालित बैग निर्माण उद्यमों को बढ़ावा देना और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करना है। जीविका के अधिकारियों का कहना है कि मुजफ्फरपुर में जीविका का बेला बैग क्लस्टर एक प्रभावी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित किया जा रहा है। इसके लिए उद्योग विभाग ने आधारभूत संरचना उपलब्ध करा रखी है, जहां जीविका की ओर से सामुदायिक सशक्तिकरण एवं उद्यम विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच इस बैग क्लस्टर ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। दीदियों के अथक परिश्रम और लगन के फलस्वरूप आज जिले में जहां 42 बैग उद्यम संचालित हो रहे हैं वहीं इसके माध्यम से 36 लाख 68 हजार बैग एवं रेन कवर का उत्पादन किया जा चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि बैग क्लस्टर शेड्स से 19 करोड़ 3 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है। मौजूदा समय में औसत मासिक टर्नओवर करीब 43 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
बेला बैग क्लस्टर में उद्यमी दीदियां सिलाई का कार्य करती हैं और उन्हें औसतन पारश्रमिक के रूप में करीब 10-12 हजार रुपये तक मासिक आमदनी आसानी के साथ हो जा रही है। बैग क्लस्टर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त उत्पादन शेड, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, क्लस्टर कार्यालय, श्रमिकों के बच्चों के लिए क्रेच (पालना घर) और जीविका दीदी की रसोई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां अनुकूल कार्य स्थल के वातावरण के साथ-साथ महिला रोजगार की दिशा में एक वरदान साबित हो रही हैं। बता दें कि मुजफ्फरपुर का बेला बैग क्लस्टर महिलाओं के नेतृत्व में संचालित विनिर्माण उद्यमों को सशक्त बनाने, ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, उत्पाद गुणवत्ता एवं बाजार तक पहुंच में सुधार लाने के साथ ही एक स्थायी बैग निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
इस मामले में ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका समूहों से जुड़े दीदियों को हर स्तर पर सशक्त बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बैग बनाने से लेकर इस तरह के कई उत्पादों से जुड़े कारखानों को स्थापित करने के लिए भी दीदियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हाल में जीविका दीदियों को व्यावसाय समेत ऐसे अन्य तरह के स्वरोजगार को विकसित कराने के लिए हाल में सहायकों की नियुक्ति की गई है। आने वाले समय में ऐसे कई रोजगार के मॉडल जीविका के स्तर पर विकसित किए जाएंगे।
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