मुजफ्फरनगर , मई 7 -- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिला स्थित तुगलपुर कम्हेडा काऊ सेन्चूरी में निराश्रित गौवंशीय पशुओं की नस्ल सुधार योजना का शुभारम्भ कर दिया गया है। कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के माध्यम से यहां थार पारकर नस्ल के दो बछड़े तथा गिर नस्ल की दो बछिया पैदा हुई हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने गुरुवार को गोवर्धन गौ सेवा समिति के सदस्यों के साथ काऊ सेन्चूरी का दौरा कर पूरे अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से निराश्रित गौवंश की नस्ल सुधार योजना चलाई जा रही है। इसके तहत जिलेभर से पकड़े गए निराश्रित पशुओं में चयनित बछियों का कृत्रिम गर्भाधान कर उन्नत नस्ल विकसित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत 500 पशुओं के लिए हरित प्रदेश सहकारी समिति को मान्यता दी गई है। एक पशु के गर्भाधान पर लगभग 25 हजार रुपये खर्च होंगे। अब तक 161 पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा चुका है। डॉ. बालियान ने बताया कि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के सहयोग से कृत्रिम गर्भाधान के जरिए दो बछड़े 'हीरा' और 'मोती' तथा दो बछिया 'पदमणि' और 'नंदिनी' पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत नस्ल के सांड और गाय के सीमन का उपयोग कर यह नस्ल सुधार कार्यक्रम शुरू किया गया है। भविष्य में ये बछियाएं प्रतिदिन 20 से 25 लीटर तक दूध देने में सक्षम होंगी।

उन्होंने बताया कि नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत पैदा हुए बछड़ों को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड अपने कार्यक्रमों में उपयोग करेगा, जिससे उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाई जा सके। डॉ. बालियान ने कहा कि काऊ सेन्चूरी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां गैस प्लांट लगाने की योजना भी तैयार की गई है, लेकिन प्रदेश सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण कार्य फिलहाल रुका हुआ है। इसके अलावा पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या दूर करने हेतु साइलेज बनाने की मशीन भी स्थापित की गई है।

इस अवसर पर गोवर्धन गो सेवा समिति के संरक्षक एवं समाजसेवी भीमसैन कंसल, सचिव विपुल भटनागर, डॉ. शुभम मलिक तथा गन्ना समिति के चेयरमैन शंकर सिंह भोला सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

इस दौरान डॉ. बालियान ने यह भी बताया कि काऊ सेन्चूरी परिसर में ही नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से एक आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा रहा है। यहां 'मैत्री' नाम से जाने जाने वाले पशु मित्रों को तीन माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षित पशु मित्र ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की चिकित्सा सेवाएं दे सकेंगे।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अगले तीन माह में प्रशिक्षण केंद्र के तैयार होने की संभावना है। परिसर में प्रशिक्षणार्थियों के लिए 80 बेड का छात्रावास तथा प्रशिक्षकों के लिए आवासीय सुविधा भी विकसित की जा रही है।

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