नैनीताल , मई 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य आंदोलन से जुड़े बहुचर्चित रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) कांड मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश जवाबी हलफनामा पर दो दिन में अपना पूरक शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अब दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रमन साह की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में सुनवाई हुई। सीबीआई की ओर से आज इस मामले में जवाबी हलफनामा दायर किया गया। सीबीआई की ओर से कहा गया है कि इस मामले में मुख्य आरोपी अनन्त कुमार सिंह के साथ ही पांच अन्य आरोपियों को छोड़ा गया है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि वह सीबीआई के जवाबी हलफनामा पर अपना जवाब पेश करें। याचिकाकर्ता की ओर जवाब फाइल करने के लिए दो दिन का समय मांगा। अंत में अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी।
याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि देहरादून जिला अदालत की ओर 05 मार्च, 2005 को मुजफ्फरनगर कांड के मुख्य आरोपी और तत्कालीन जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह तथा 12 अन्य अधिकारियों के खिलाफ हत्या से जुड़े मामले (42/1996) को बिना किसी आदेश के देहरादून से मुजफ्फरनगर स्थानांतरित कर दिया। जो कि गलत है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि जिला न्यायाधीश को मामले को स्थानांतरित करने को कोई अधिकार नहीं है। यह राज्य आंदोलनकारियों के खिलाफ अन्याय है। याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया कि मुजफ्फरनगर कांड से जुड़े पांच मामले देहरादून जिला न्यायाधीश की अदालत में चल रहे थे। इस मामले से जुड़े मुलजिमों की मांग पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2004 में चार मामलों को मुजफ्फरनगर स्थानांतरित करने के आदेश दे दिये थे।
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