देहरादून , जून 23 -- उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में मंगलवार को राज्य सरकार के 26 सूत्रीय कार्यक्रम की मई माह की मासिक प्रगति रिपोर्ट की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई जिसमें चंपावत जनपद का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने सभी जिलों को योजनाओं की नियमित समीक्षा, बेहतर समन्वय और हितधारकों के साथ सतत संवाद स्थापित कर प्रगति को और गति देने के निर्देश दिए। साथ ही जिन क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं है, वहां त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया।
मई मास की समीक्षा के अनुसार चंपावत 65.94 प्रतिशत अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। हरिद्वार (59.30 प्रतिशत) और पिथौरागढ़ (57.87 प्रतिशत) ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। देहरादून (56.65 प्रतिशत), रुद्रप्रयाग (56.44 प्रतिशत) तथा चमोली (54.12 प्रतिशत) ने भी संतोषजनक प्रगति दर्ज करते हुए विकास कार्यों को गति प्रदान की।
मुख्य सचिव ने सभी जनपदों को उत्कृष्ट जिलों के नवाचारों और कार्यप्रणाली से सीख लेकर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि अतिक्रमण हटाने के अभियान में नगर निकायों ने 98.20 प्रतिशत सफलता प्राप्त की है, जो प्रभावी प्रशासनिक कार्य प्रणाली का उदाहरण है। डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करते हुए राज्य की 97.02 प्रतिशत सरकारी संपत्तियों का जियो-टैगिंग कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं "अपणि सरकार" पोर्टल पर प्राप्त जन शिकायतों के निस्तारण की दर 82.68 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार परिलक्षित होता है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यक्षमता 89.47 प्रतिशत रही। प्रदेश में 133 पार्किंग परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, जिनकी औसत भौतिक प्रगति 67.33 प्रतिशत दर्ज की गई है।
मुख्य सचिव ने राजस्व संग्रह, औद्योगिक विकास, नदी संरक्षण, पर्यटन, पेयजल, शहरी विकास एवं अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कार्यों को और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय समन्वय, नियमित मॉनिटरिंग तथा स्थानीय स्तर पर लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली अपनाकर आगामी महीनों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया गया कि शहरी विकास एवं पंचायती राज विभाग स्थानीय निकायों की राजस्व क्षमता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा के तहत जनपदवार लक्ष्य तय करने, राजस्व विभाग द्वारा जिला स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने तथा वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रमों के लिए आवश्यक लक्ष्य एवं बजट निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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