पटना, जुलाई 14 -- बिहार में मुख्यमंत्री होमस्टे योजना के लागू होने के साथ अब बिहार में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को होटलों के बजाय बिहारी परिवारों के घरों में ठहरने का अवसर मिलेगा।

बिहार में पर्यटन को नई पहचान देने की ओर आगे बढ़ते हुए राज्य सरकार ने पहली बार मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इससे संबंधित मसौदे पर मुहर लगी है।

इस योजना के कार्यान्वयन के बाद देश और दुनिया से आने वाले पर्यटक बिहार की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक खानपान और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव कर सकेंगे, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

बिहार सरकार ने राज्य के 16 जिलों के 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों को होमस्टे योजना के अंतर्गत चयनित किया गया है। इनमें गया जिले के बोधगया महाबोधि मंदिर, विष्णुपद मंदिर, डुंगेश्वरी मंदिर, प्रेत शिला एवं गुरूपा हिल, नालंदा जिले के नालंदा महाविहार, भग्नावशेष, पवापुरी का जल मंदिर, राजगीर रोपवे, राजगीर जू सफारी, नेचर सफारी एवं राजगीर कुंड, वैशाली का विश्वशांति स्तूप, कैमूर का मुंडेश्वरी मंदिर परिसर, पूर्वी चंपारण के केसरिया स्तूप एवं सीता कुंड, रोहतास के शेरशाह सूरी का मकबरा, मांझर कुंड एवं धुआं कुंड, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एवं गांधी आश्रम भितिहरवा, जहानाबाद की बराबर गुफाएं, नवादा का ककोलत जलप्रपात, बांका के मंदार पर्वत एवं ओढ़नी डैम, मुजफ्फरपुर की मनिकामन झील एवं गरीबनाथ धाम, मुंगेर का भीमबांध वन्य अभयारण्य, सीतामढ़ी के पुनौरा धाम एवं पंथ पाकड़, जमुई के लछुआर जैन मंदिर एवं नई नकटी डैम तथा औरंगाबाद का देव सूर्य मंदिर जैसे अनेक धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल शामिल हैं।

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