रांची , मार्च 09 -- झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को सरकारी पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियों का मुद्दा उठाया गया।
वहीं राज्य में अवैध अफीम की खेती का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। लिट्टिपाड़ा से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हेमलाल मुर्मु ने इस विषय पर सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती हो रही है, जो कानून-व्यवस्था और सामाजिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।
विधायक श्री मुर्मु ने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अफीम की अवैध खेती में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में लगभग 2871 एकड़ भूमि पर अफीम की खेती पाई गई थी। इसके बाद वर्ष 2022-23 में यह बढ़कर 5494 एकड़ और 2023-24 में 4853 एकड़ तक पहुंच गई।
उन्होंने कहा कि सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 27,215 एकड़ तक पहुंच गया है। श्री मुर्मु ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खेती आखिर किन लोगों के संरक्षण में हो रही है और इसे रोकने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।
विधायक श्री मुर्मू ने सरकार से यह भी जानकारी मांगी कि पिछले चार वर्षों में अवैध अफीम की खेती से जुड़े कितने मामले दर्ज किए गए, उनमें कितनी जांच लंबित है और अब तक कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि युवाओं को नशे की ओर धकेलने का खतरा भी पैदा करती हैं, इसलिए इस पर कठोर कार्रवाई की जरूरत है।
सदन में कई विधायकों ने हेमलाल मुर्मू की बात का समर्थन किया। इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने स्वीकार किया कि वर्ष 2024-25 में राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 27,215 एकड़ भूमि पर अफीम की अवैध खेती के मामले सामने आए थे।
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने विशेष अभियान चलाकर इस अवैध खेती को नष्ट करने की कार्रवाई की है। मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती और तस्करी को रोकने के लिए राज्य सरकार लगातार अभियान चला रही है। यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस विभाग के किसी अधिकारी की संलिप्तता का मामला सामने नहीं आया है।
इससे पहले गढ़वा से भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 73,000 पद रिक्त हैं।उन्होंने एचआरएमएस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड में स्वीकृत 3,51,000 पदों के मुकाबले करीब 1,54,000 पद खाली हैं, जो लगभग 45 प्रतिशत है।
श्री तिवारी के प्रश्न का उत्तर देते हुए झारखंड के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में 30,000 से अधिक पद भरे जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि पिछले 20-25 वर्षों से कई पद रिक्त हैं और सरकार अपने वित्तीय संसाधनों तथा आवश्यकताओं के अनुसार भर्ती प्रक्रिया जारी रखे हुए है। विभागों से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के माध्यम से लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं।
इससे पहले, भाजपा के रांची विधायक सी पी सिंह ने सवाल उठाया कि क्या विभागों से मांग संबंधी आवेदन प्राप्त होने तक पद रिक्त ही रहेंगे, क्या वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए नियुक्तियां नहीं की जाएंगी? उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियां होने के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या विभागों से अधियाचना नहीं आ रही है, जिसके कारण ये पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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