रांची , जनवरी 27 -- झारखंड के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि दावोस में भारत के पांच मुख्यमंत्री अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

जहां एक ओर महाराष्ट्र सरकार ने दावोस में लगभग Rs.14 से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए, वहीं तेलंगाना सरकार ने करीब Rs.29,000 करोड़ रुपये के ठोस निवेश करार किए, जिनमें डेटा सेंटर, एआई, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर शामिल हैं। अन्य राज्यों में भी हजारों करोड़ के ठोस निवेश के वायदे प्राप्त किया।

श्री शाहदेव ने कहा कि दूसरी ओर, झारखंड के हिस्से में एक भी नया बड़ा निवेश समझौता नहीं आया।दावोस में जिस टाटा स्टील के साथ पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन समझौते को झारखंड सरकार उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है, वह कोई नया निवेश नहीं बल्कि पहले से स्वीकृत और घोषित परियोजनाओं की री-पैकेजिंग मात्र है। झारखंड में टाटा स्टील का अधिकांश बड़ा निवेश पहले ही मंजूर और घोषित है -जमशेदपुर प्लांट काआधुनिकीकरण, खनन लीज और कैप्टिव माइंस, पूर्व में स्वीकृत विस्तार योजनाएँ।

श्री शाहदेव ने कहा कि दावोस में न तो किसी नई यूनिट की घोषणा हुई, न नई स्टील प्लांट क्षमता की, न किसी नई लोकेशन की जानकारी दी गई।सबसे गंभीर बात यह है कि एमओयू की राशि, समय-सीमा और संभावित रोजगार के आंकड़े तक सार्वजनिक नहीं किए गए, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।यह साफ दिखाता है कि झारखंड सरकार के पास दावोस में दिखाने के लिएनया विज़न नहीं, केवल पुरानी फाइलें और फोटो-ऑप थे।

श्री शाहदेव ने कहा ऐसे भी मुख्यमंत्री को सिर्फ वही देश भाते हैं जो पर्यटन के लिहाज से सर्वोच्च माने जाते हैं।स्वीडन, स्पेन के बाद मुख्यमंत्री जी बर्फ के मौसम में स्विट्ज़रलैंड की दर्शनीय वादियों का आनंद लेकर आ गए। उन्होंने कहा कि भाजपा इसे स्पष्ट रूप से "पुराने निवेश को नई पैकेजिंग में बेचने की कोशिश" मानती है। झारखंड का युवा रोजगार चाहता है, उद्योग चाहता है। लेकिन मुख्यमंत्री दावोस से निवेश नहीं, सिर्फ प्रचार लेकर लौटे हैं। झारखंड को विकास चाहिए,पर्यटन राजनीति नहीं।

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