लखनऊ , फरवरी 27 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंघ के संस्थापक सदस्य, राष्ट्रऋषि और 'भारत रत्न' नानाजी देशमुख पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नानाजी देशमुख का तप, त्याग और राष्ट्रसेवा का जीवन सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंत्योदय और ग्रामोदय को जीवन का संकल्प बनाकर नानाजी ने सेवा, त्याग एवं राष्ट्र निर्माण की जो अमिट परंपरा स्थापित की, वह सदैव हम सभी का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि नानाजी का संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा।

गौरतलब है कि नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली में एक मराठी भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आर्थिक अभावों के बीच उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और पढ़ाई के लिए सब्जी बेचने तक का कार्य किया।

उन्होंने राजस्थान के सीकर से हाईस्कूल की शिक्षा प्राप्त की, जहां सीकर के रावराजा ने उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान की।

वर्ष 1952 में भारतीय जनसंघ स्थापना के बाद उत्तर प्रदेश में संगठन का दायित्व नानाजी को सौंपा गया। 1967 में वे जनसंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बनकर दिल्ली पहुंचे।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के बाद 1968 में उन्होंने दिल्ली में दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना की, जिसने ग्रामीण विकास और स्वावलंबन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित