वाराणसी , जुलाई 4 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आठ जुलाई को प्रस्तावित वाराणसी दौरे के दौरान 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' का शुभारंभ किए जाने की संभावना है।
आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर संचालित इस योजना के तहत वाराणसी के बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के 1,145 विद्यालयों के 12,407 पात्र शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक तथा अन्य शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों के स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस योजना की घोषणा की थी। योजना का उद्देश्य शिक्षकों एवं शिक्षा कर्मियों को गंभीर बीमारियों के उपचार के दौरान आर्थिक चिंता से मुक्त कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से शिक्षक उपचार की चिंता से मुक्त होकर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में और अधिक प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने शनिवार को बताया कि योजना का लाभ जिले के 12,407 शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक तथा अन्य शिक्षा कर्मियों को मिलेगा। जिले के 1,145 विद्यालयों के पात्र कर्मचारियों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 1,145 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 6,580 शिक्षक, 1,538 शिक्षामित्र, 348 अनुदेशक, 3,802 रसोइये, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की 135 शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी तथा चार स्पेशल एजुकेटर कार्यरत हैं। ये सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण एवं समग्र शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कंपोजिट विद्यालय गंगापुर की सहायक अध्यापिका तूबा असीम ने कहा कि योजना से शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। उपचार के लिए आर्थिक संसाधनों की चिंता कम होगी तथा समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने इसे शिक्षकों के सम्मान और कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्राथमिक विद्यालय, केसरीपुर खास के सहायक अध्यापक राजीव सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हजारों शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। इससे गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी और वे अधिक आत्मविश्वास एवं समर्पण के साथ विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
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