लखनऊ , मई 7 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान कानपुर की मूक-बधिर बच्ची "खुशी" की प्रेरक कहानी सुनाकर पूरे सभागार को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर दिव्यांगजन में प्रतिभा होती है, जरूरत केवल सही अवसर, संवेदना और सहयोग की होती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि कुछ समय पहले कानपुर की एक बच्ची, जो न सुन सकती थी और न बोल सकती थी, सिर्फ उनसे मिलने और अपने हाथों से बनाया चित्र भेंट करने के लिए अकेले कानपुर से लखनऊ पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि आज वही बच्ची इलाज के बाद सुन भी रही है और बोलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
योगी ने कहा, "मुझे याद है कानपुर की एक बिटिया की कहानी। एक दिन वह बिना किसी को बताए कानपुर से पैदल लखनऊ आ गई। विधान भवन के सामने चुपचाप बैठ गई। वह न बोल सकती थी, न सुन सकती थी। उसने अपने हाथ से मेरा एक छोटा सा चित्र बनाकर सामने रख दिया था।"उन्होंने बताया कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रशिक्षित शिक्षकों ने इशारों में उससे संवाद किया और उसके परिवार का पता लगाकर उसे सुरक्षित कानपुर भेजा। बाद में जब उन्हें इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने बच्ची को दोबारा बुलाकर उसके इलाज की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए।
दरअसल, कानपुर की रहने वाली खुशी नवंबर 2025 में बिना बताए घर से निकल पड़ी थी और लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर लखनऊ पहुंच गई थी। विधान भवन के बाहर रोते हुए मिलने पर पुलिस उसे सुरक्षित थाने ले गई। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि बच्ची को सुनने के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट की आवश्यकता है। इस ऑपरेशन पर लगभग छह से सात लाख रुपये का खर्च आना था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एक फाउंडेशन के सहयोग से उसके इलाज की पूरी व्यवस्था कराई गई।
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