पटना , मई 23 -- िहार के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और प्रत्येक बसावट तक बारहमासी संपर्कता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। राज्य के उन दुर्गम टोलों, बस्तियों और ग्रामीण बसावटों को विशेष प्राथमिकता के आधार पर पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है, जो वर्षों से संपर्कता के अभाव में मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे।

ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा राज्यव्यापी सर्वेक्षण अभियान चलाकर उन सभी छूटी हुई बसावटों की पहचान की गई है, जहाँ अब तक सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। योजना के क्रियान्वयन में उन जिलों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जो भौगोलिक दृष्टि से जटिल, पहाड़ी या पूर्व में विकास से अपेक्षाकृत दूर रहे हैं। इस दिशा में पूरे राज्य में कुल 11,020 ऐसी संपर्क-विहीन बसावटों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें 14,002 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इन बसावटों को मुख्य सड़क नेटवर्क और राज्यमार्गों से जोड़ने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तेजी से स्वीकृतियाँ प्रदान की जा रही हैं। अब तक 6,078 बसावटों को जोड़ने हेतु 8,035 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण को प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है।

ग्रामीण कार्य विभाग के प्रयास से परियोजनाएँ धरातल पर तेजी से उतर रही हैं। इस दिशा में पूर्वी चंपारण जिले में सर्वाधिक 252 बसावटों को 361 किलोमीटर लंबी सड़कों के माध्यम से मुख्य मार्गों से जोड़ा जा चुका है। वहीं औरंगाबाद जिले में अब तक 163 छूटी हुई बसावटों को 154 किलोमीटर, बांका जिले में 146 बसावटों को 149 किलोमीटर तथा मुजफ्फरपुर जिले में 82 बसावटों को 70 किलोमीटर लंबी बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ा जा चुका है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से उन ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की दशकों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित हुआ है। अंतिम बसावटों तक पहुँची इन पक्की सड़कों का ग्रामीण जनजीवन पर व्यापक प्रभाव दिखाई दे रहा है। पहले जहाँ बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता था, वहीं अब बारहमासी सड़कों के निर्माण से आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है।

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