नैनीताल , मार्च 07 -- उत्तराखंड में नैनीताल के मुक्तेश्वर में विला दिलाने के नाम पर लगभग 06 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले को मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने गंभीरता से लेते हुए बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

आरोप है कि हिलक्रस्ट एवं शिखर प्रॉपर्टीज के बिल्डर मनोज जोशी ने छह लोगों से एक-एक करोड़ रुपये लेकर भी न तो प्राधिकरण से नक्शा पास कराया और न ही तय समय सीमा में भवन निर्माण की औपचारिकताएं पूरी की।

शनिवार को हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में शिकायतकर्ताओं ने बताया कि बिल्डर द्वारा स्टांप पेपर पर 31 मार्च, 2025 तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर भवन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब तक न तो नक्शा स्वीकृत कराया गया और न ही निर्माण कार्य पूरा किया गया।

मामले को गंभीर मानते हुए आयुक्त ने तत्काल बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने तथा विकास प्राधिकरण के जेई को मौके का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी जांच करने को कहा गया कि जहां प्लॉटिंग और विला बनाए जा रहे हैं, वह भूमि वास्तव में संबंधित कंपनी के नाम दर्ज है या नहीं।

जनसुनवाई के दौरान आयुक्त दीपक रावत ने पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ रहे अवैध निर्माण और अनियोजित प्लॉटिंग पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी भवन को सील किए जाने के बाद भी बिना अनुमति दोबारा निर्माण होता है तो संबंधित क्षेत्र के प्राधिकरण के कनिष्ठ अभियंता (जेई) की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने सीलिंग कार्रवाई के दौरान अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराने और जेई को नियमित क्षेत्र भ्रमण करने के निर्देश भी दिए।

आयुक्त ने कहा कि मुक्तेश्वर क्षेत्र में कई स्थानों पर होमस्टे के नाम पर बहुमंजिला इमारतें बनाकर होटल और रिसॉर्ट संचालित किए जा रहे हैं, जो भू-कानून का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने वर्ष 2022 के बाद बने सभी भवनों के अभिलेखों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा हल्द्वानी में इंडेन गैस वितरण प्रणाली में कम तौल के सिलेंडर और कालाबाजारी की शिकायत पर आयुक्त ने कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक को सख्त कार्रवाई करने और औचक निरीक्षण व छापेमारी के निर्देश दिए।

भवाली क्षेत्र के नागरी गांव में फॉरेस्ट लैंड पर अवैध कब्जे का मामला सामने आने पर आयुक्त ने राजस्व विभाग को वन विभाग और प्राधिकरण के साथ समन्वय कर कार्रवाई करने तथा अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही सरकारी भूमि की बिक्री और अवैध कब्जे के मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लैंड ग्रैबिंग के तहत मुकदमा दर्ज करने को भी कहा।

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