पटना , जुलाई 31 -- ला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह-2026" के अवसर पर महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी 'कफ़न' पर आधारित नाटक का मंचन शुक्रवार को प्रेमचंद रंगशाला, राजेंद्र नगर, पटना में किया गया।इस नाट्य प्रस्तुति का नाट्यरूपांतरण एवं निर्देशन गुंजन कुमार ने किया तथा इसका मंचन रंग गुरुकुल, पटना द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति प्रेमचंद के यथार्थवादी साहित्य को रंगमंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं उद्घाटनकर्ता कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार थे।

मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी 'कफ़न' भारतीय समाज में व्याप्त गरीबी, शोषण, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदनाओं के क्षरण का अत्यंत मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है।

नाटक के केंद्र में घीसू और उसका पुत्र माधव हैं, जो अभाव और उपेक्षा से भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। माधव की पत्नी बुधिया प्रसव पीड़ा से जूझती रहती है, जबकि पिता-पुत्र अपनी विवशताओं और परिस्थितियों के कारण उसकी सहायता करने में असमर्थ दिखाई देते हैं। बुधिया की मृत्यु के बाद गाँव के लोग उसके अंतिम संस्कार के लिए चंदा एकत्रित करते हैं, किंतु घीसू और माधव उस धन से कफ़न खरीदने के बजाय भोजन और शराब का सेवन कर लेते हैं। यह प्रसंग दर्शकों के सामने एक गहरा प्रश्न छोड़ता है कि क्या वे वास्तव में संवेदनहीन हैं अथवा अत्यधिक गरीबी और सामाजिक विषमता ने उनकी मानवीय संवेदनाओं को कुंठित कर दिया है।

यह प्रस्तुति केवल एक कहानी का मंचन नहीं, बल्कि समाज की उन विडंबनाओं का सशक्त प्रतिबिंब है, जहाँ भूख, अभाव और असमानता मनुष्य की सोच और व्यवहार को प्रभावित करती है।

नाटक के निर्देशक गुंजन कुमार ने बताया कि यह प्रस्तुति प्रेमचंद के मूल भावों को आधुनिक रंगभाषा, प्रभावशाली अभिनय, संगीत एवं प्रकाश योजना के माध्यम से दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि 'कफ़न' आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सामाजिक असमानता, गरीबी और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है।

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