वाराणसी , जुलाई 31 -- उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को उनके पैतृक गाँव लमही में संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में "लमही महोत्सव" का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर लमही स्थित उनके स्मारक में मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर सदस्य विधान परिषद (एम.एल.सी.) धर्मेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने पुष्पांजलि अर्पित की।
अपने संबोधन में एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने कल्पना से अधिक वास्तविक जीवन को महत्व दिया। उन्होंने किसानों की गरीबी, जमींदारी प्रथा, जातीय भेदभाव, महिलाओं की स्थिति, भ्रष्टाचार, शोषण और सामाजिक कुरीतियों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। उनकी भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की थी, जिससे उनकी रचनाएं हर वर्ग के लोगों तक पहुंचीं। उनकी कहानियां केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समाज को सोचने और बदलने की प्रेरणा भी देती हैं।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि बचपन में हम सभी ने ईदगाह कहानी पढ़ी हैं और दादी व हामिद की भावनात्मक बातें सुनीं हैं। कैसे वो लड़का अपनी दादी के लिए मेले से चिमटा ले आता है। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानी कफ़न के बारे में भी चर्चा की। कहा कि जो उन्होंने लिखा है और समाज को उसमे जिस प्रकार से पिरोया है, वो काबिले तारीफ़ है। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद जी ने आने वाले जनरेशन के लिए बहुत कुछ छोड़ा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं पर आधारित विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रेमचंद मार्गदर्शन केन्द्र द्वारा 'पागल हाथी' कहानी-पाठ प्रस्तुत किया गया। यथार्थ क्रिएशन सोसाइटी द्वारा 'बड़े घर की बेटी', प्रेरणा कला मंच द्वारा 'कफन', नवरचना कॉन्वेंट स्कूल द्वारा 'ईदगाह' प्रस्तुत किया गया। संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल कोइराजपुर द्वारा 'पंच परमेश्वर', संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, गिलट बाजार द्वारा 'मंत्र' नाटक एवं सनवैली पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा पंच परमेश्वर नाटक की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दी गईं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित