मुंबई , सितंबर 20 -- मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के लिए ग्रीन-ब्लू कार्बन बैंक बनाने का प्रस्ताव जोर पकड़ता जा रहा है और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इस बैंक में मैंग्रोव, आर्द्रभूमि, शहरी जंगलों और अन्य प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों में मौजूद कार्बन के मूल्य का इस्तेमाल किया जाएगा। नेटकनेक्ट फाउंडेशन ने यह प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन प्राकृतिक क्षेत्रों में जमा और उनके द्वारा सोखे जाने वाले कार्बन की वैज्ञानिक तरीके से मात्रा मापी और प्रमाणित की जा सकती है या नहीं तथा उसे कार्बन क्रेडिट में बदला जा सकता है या नहीं। इससे प्राकृतिक क्षेत्रों के संरक्षण के लिए धन जुटाने का एक संभावित स्रोत तैयार हो सकता है।

कार्बन बाजार और जलवायु नीति से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वाले लंदन स्थित प्रकाशन कार्बन पल्स ने इस प्रस्ताव को प्रमुखता से उठाया है और एमएमआर को इस अवधारणा के परीक्षण के संभावित क्षेत्र के रूप में बताया है। यह प्रस्ताव नवी मुंबई के मैंग्रोव और आर्द्रभूमि को बचाने के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयासों के बीच आया है। इन क्षेत्रों में फ्लेमिंगो की मौतों, कानूनी विवादों और संरक्षण रिजर्व बनाने की लंबित योजना को लेकर चिंता बनी हुई है।

इस विचार को उस समय और महत्व मिला जब एक सरकारी स्वामित्व वाली शहरी विकास एजेंसी ने नवी मुंबई की 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली डीपीएस फ्लेमिंगो झील का मूल्य कथित तौर पर करीब 3,600 करोड़ रुपये आंका।

नेटकनेक्ट के निदेशक बी. एन. कुमार ने कहा कि यदि किसी आर्द्रभूमि को विकास के लिए आर्थिक मूल्य दिया जा सकता है तो उसके व्यापक आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व का भी आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के आकलन में कार्बन का भंडारण, बाढ़ से सुरक्षा, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन से निपटने में प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र की भूमिका को शामिल किया जाना चाहिए।

नेटकनेक्ट ने यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा है। मंत्रालय ने इस विचार की सराहना की और इसे महाराष्ट्र के अधिकारियों को भेजते हुए इस संबंध में की गयी कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। इस प्रस्ताव पर एक प्रमुख निजी विश्वविद्यालय में चल रही अकादमिक शोध परियोजना के तहत भी अध्ययन किया जा रहा है, जिसमें कुमार सह-लेखक हैं।

कार्बन बाजार के विशेषज्ञ जलवायु एवं स्थिरता क्षेत्र के पेशेवर सचिन पात्र ने कहा कि मैंग्रोव और आर्द्रभूमि में जमा कार्बन का आकलन करने के लिए मौजूदा ब्लू-कार्बन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक कार्बन बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले प्रकृति-आधारित कार्बन क्रेडिट की मांग बढ़ रही है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कार्बन की कीमत तय करने का महत्व लगातार बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था अब अपने अंतिम चरण में है, जबकि ब्रिटेन जनवरी 2027 से अपनी कार्बन सीमा व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है।

राज्य के पर्यावरण एवं सतत विकास कार्यबल के कार्यकारी अध्यक्ष पाशा पटेल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखा है। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन की कीमत तय किए जाने से भारतीय उद्योग और निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए इस मुद्दे को उठाया है।

श्री कुमार ने कहा कि इसका उद्देश्य प्रकृति का व्यावसायीकरण करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के आर्थिक मूल्य को पहचानना और इसका इस्तेमाल संरक्षण तथा शहरी नियोजन को मजबूत करने के लिए करना है।

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