पटना , अक्टूबर 22 -- बिहार में पहले चरण में छह नवंबर को 121 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव में मुंगेर जिले की सभी तीन सीटो पर विभिन्न दलों ने अपने विधायकों को बेटिकट कर दिया है ,वहीं तारापुर सीट पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जमालपुर सीट पर 'खाकी' के बाद 'खादी' की शोभा बढ़ाने के लिये चुनावी रण में उतरे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी शिवदीप लांडे की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस बार के चुनाव में मुंगेर जिले की सभी तीन सीटों तारापुर, मुंगेर और जमालपुर के विधायक बेटिकट कर दिये गये हैं। मुंगेर सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक प्रणव कुमार, तारापुर से जनता दल यूनाईटेड (जदयू) विधायक राजीव कुमार सिंह और जमालपुर से कांग्रेस विधायक अजय कुमार सिंह बेटिकट कर दिये गये हैं।

तारापुर सीट से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। तारापुर सीट पर सम्राट चौधरी के पिता और पूर्व सांसद शकुनी चौधरी का दबदबा रहा है। तारापुर विधानसभा सीट पर शकुनी चौधरी ने 25 वर्षो तक अपना वर्चस्व बनाये रखा। श्री चौधरी ने इस सीट से वर्ष 1985,1990, 1995, 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के चुनाव में जीत हासिल की थी हालांकि वर्ष 2010 के चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीता चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) उम्मीदवार शकुनी चौधरी को पराजित कर उनका विजयी रथ रोक दिया। इस सीट से शकुनी चौधरी की पत्नी और सम्राट चौधर की मां पार्वती देवी भी विधायक बनी है। वर्ष 1998 में खगड़िया लोकसभा सीट से शकुनी चौधरी सांसद बने थे। सांसद बनने के बाद शकुनी चौधरी ने तारापुर सीट छोड़ दी थी। रिक्त हुयी तारापुर सीट पर वर्ष 1998 के उपचुनाव में पार्वती देवी ने जीत हासिल की थी।

वर्ष 2015 के चुनाव में नीता चौधरी के पति जदयू उम्मीदवार डा. मेवालाल चौधरी ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के उम्मीदवार शकुनी चौधरी को परास्त कर दिया। वर्ष 2021 में मेवाल लाल चौधरी के निधन के बाद रिक्त हुयी तारापुर सीट पर हुये उपचुनाव में जदयू के राजीव सिंह ने जीत हासिल की थी। इस बार के चुनाव में भाजपा के टिकट पर समर में उतरे सम्राट चौधरी पर अपने परिवार की परंपरागत सीट फिर हासिल करने की चुनौती है। महागठबंधन के घटक राजद ने श्री चौधरी को चुनौती देने के लिये अरूण कुमार को अखाड़े में उतारा है। इस सीट पर 13 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनाव में किसका 'सितारा' बुलंद होता है।

जमालपुर शहर रेल इंजन कारखाना के लिए जाना जाता है। जमालपुर विधानसभा सीट से महागठबंधन के घटक कांग्रेस ने विधायक अजय कुमार सिंहको बेटिकट कर दिया है। महागठबंधन में सीटों के तालमेल के तहत यह सीट इंडियन इंक्लूसिव पार्टी को मिली है। इंडियन इंक्लूसिव पार्टी ने इस सीट पर नरेन्द्र तांती को उम्मीदवार बनाया गया है। जदयू ने यहां पूर्व सांसद दिवंगत ब्रह्मानंद मंडल के पुत्र नचिकेता मंडल को अखाड़े में उतारा है। वहीं जदयू से बागी पूर्व मंत्री शैलेश कुमार निर्दलीय प्रत्याशी समर में उतर आये हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन जिला अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने पूर्व ग्रामीण कार्य मंत्री और जदयू उम्मीदवार शैलेश कुमार को मात दी थी। बह्रानंद मंडल ने मुंगेर में गंगा पर रेल सह सड़क पुल का निर्माण के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष किया। उन्होंने अपने साथियों के साथ मुंगेर में भूख हड़ताल करते हुए 14 दिनों तक आमरण अनशन किया था। जिसका परिणाम रहा कि मुंगेर में गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल का निर्माण हो सका।

जमालपुर विधानसभा सीट पर स्व. उपेन्द्र प्रसाद वर्मा ने लगातार 25 वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया। स्व. वर्मा ने वर्ष 1980,1985,1990,1995 और वर्ष 2000 के वुनाव में जीत हासिल की लेकिन 2005 फरवरी में उनके विजय रथ को जदयू के शैलश कुमार ने रोका दिया था। इसके बाद श्री शैलेश कुमारअक्टूबर 2005, 2010 और 2015 में भी इस सीट पर जीत हासिल की। श्री कुमार के पिता सुरेश कुमार सिंह ने दो बार (1972-77) इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। इस सीट पर 15 प्रत्याशी मैदान में डटे हैं।

मुंगेर सीट से भाजपा ने जमीनी कार्यकर्ता कुमार प्रणय को उम्मीदवार बनाया है, वहीं राजद ने अविनाश कुमार विद्याथी को चुनावी दंगल में उतारा है। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के प्रणव कुमार ने राजद के अविनाश कुमार विद्यार्थी को सियासी अखाड़े में धूल चटायी थी। मुंगेर शहर योगा आश्रम, बंदूक कारखाना और जीवंत लाल किला की वजह प्रसिद्ध है। इस सीट पर 11 प्रत्याशी जोर आजमां रहे हैं।

मुंगेर जिले की सभी तीन सीटों के विधायक इस बार के चुनाव में बेटिकट कर दिये गये हैं, देखना दिलचस्प होगा कि विधायकों के बेटिकट किये जाने के बाद उनकी जगह चुनावी समर में उतरे प्रत्याशी कितना जोर दिखाने में सफल होते है, इस बात का खुलासा 14 नवंबर को परिणाम आने के बाद ही हो पायेगा।

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