श्रीनगर , जुलाई 31 -- कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु एवं हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार अशांति पर गहरी चिंता जतायी और लोगों से बातचीत, सभी को साथ लेकर चलने और हालात से प्रभावित लोगों के अधिकारों और सम्मान का ध्यान रखने की अपील की।
मीरवाइज पुराने श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "आज जब हम प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए हैं, तो हमारे विचार और प्रार्थनाएं नियंत्रण रेखा के उस पार रहने वाले हमारे भाइयों और बहनों के साथ हैं। पिछले डेढ़ महीने से जारी अशांति और कीमती जानों के दुखद नुकसान से हमें गहरा दुख पहुंचा है। खबरों के मुताबिक, दर्जनों लोग मारे गए हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में मरने वालों की कुल संख्या इससे भी ज़्यादा बताई जा रही है।"गौरतलब है कि जून से पीओके में आर्थिक और राजनीतिक शिकायतों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हाल के दिनों में अशांति और बढ़ गयी है। खबरों के अनुसार, सोमवार और मंगलवार को विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 30 लोग मारे गये। प्रमुख धर्मगुरु ने कहा कि एक त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के ज़रिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "हम हर उस जान के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हैं जो गई है चाहे वह कोई आम प्रदर्शनकारी हो या पुलिस बल का सदस्य और सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। अल्लाह शोक संतप्त परिवारों को धैर्य और शक्ति दे और जिनके हाथों में सत्ता है, उन्हें न्याय, समझदारी और संयम की राह दिखाए।"मीरवाइज ने कहा कि एलओसी के पार, खासकर रावलकोट में हाल की घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि सरकारें भले ही इलाकों का प्रशासन चलाएं और अलग-अलग राजनीतिक रुख अपनाएं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग ही अपनी मातृभूमि के असली हकदार हैं।
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