श्रीनगर , मार्च 27 -- मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथअली से मुलाकात की।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एमएमयू के संरक्षक मीरवाइज़ उमर फारूक कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल में कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता शामिल थे, जिनमें मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम, आगा सैयद हसन अल-मोसवी, आगा सैयद हादी अल-मोसवी और आगा सैयद मुजतबा प्रमुख थे। इस मुलाकात का उद्देश्य ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर शोक व्यक्त करना और ईरान के एकजुटता जताना था। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में इस्लामी धार्मिक संगठनों एमएमयू ने खामेनेई की हत्या के विरोध में दो मार्च को कश्मीर में बंद का आह्वान भी किया था।
एमएमयू ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके परिवार के सदस्यों और नेतृत्व के अन्य सदस्यों की हत्या पर हार्दिक संवेदना व्यक्त की। साथ ही उन्होंने ईरान की जनता के प्रति गहरी एकजुटता जताई, जिसे उन्होंने उनके कठिनाई के समय के रूप में वर्णित किया। एमएमयू ने कहा, "कश्मीर की जनता की ओर से प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मुस्लिम उम्माह के एक प्रमुख और सम्मानित नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है।"प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर थोपे गए मौजूदा युद्ध पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आक्रामकता को समाप्त करने तथा शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयास सफल होंगे। प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीर और ईरान के बीच गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि कश्मीर को लंबे समय से ईरान-ए-सगीर (छोटा ईरान) के नाम से जाना जाता रहा है, जो दोनों क्षेत्रों की जनता के बीच मौजूद अटूट संबंधों को दर्शाता है।
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