नई दिल्ली , मई 5 -- राज्य सभा के उप-सभापति हरिवंश ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्र हित के मुद्दों पर देश में आम सहमति बनाने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और उसे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ कर काम करना चाहिए।

उन्होंने मीडिया क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे युवाओं को वर्तमान समय में हर क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तनों को समझने , उनके अनुसार सपने देखने और उसे साकार करने के लिए पूरी ताकत लगाने के लिए प्रेरित किया। श्री हरिवंश राजधानी के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षा केंद्र भारतीय जन-संचार संस्थान (आईआईएमसी) में पत्रकारिता पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

श्री हरिवंश ने कहा, '' यह पत्रकारिता का धर्म है कि आमजन तक छोटी-छोटी सूचनाओं को भी संप्रेषित करे ताकि देशहित के मुद्दों पर आम सहमति बन सके। इस दृष्टि से संचारकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना पड़ेगा।आज हम ऐसे दौर में हैं जब शिक्षित और अशिक्षित की परिभाषा बदल चुकी है। अब केवल लिखना-पढ़ना ही शिक्षित होने की निशानी नहीं है। नित्य नई चीजें सीखना और खुद को ज्ञान के नए परिदृश्य में परिवर्तित करते जाना आवश्यक हो गया है।"उन्होंने कहा, ''आज नयी पत्रकारिता में अपार संभावनाएं हैं। इस सूचना क्रांति के दौर में आप यदि अपना और देश का भविष्य संवारना चाहते हैं तो नए ढंग से काम करने की और लीक से हटकर नया रास्ता बनाना होगा।"उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से कहा कि प्रौद्योगिकी पहले हजारों वर्षों में परिवर्तित होती थी वो अब वर्षों और महीनों में बदल रही है। उन्होंने कहा, ' आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में आप इन्हीं बदलावों में से कोई सपना देखें और उस सपने को साकार करने के लिए अपना पूरी ताकत लगा दें। तभी आप हिंदी के पहले अखबार 'उदन्त मार्त्तण्ड' की तरह एक अमिट लकीर खींच पाएँगे।"इस अवसर पर उन्होंने आईआईएमसी की शोध पत्रिका 'संचार माध्यम' के हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा पर केंद्रित विशेषांक का विमोचन किया। कार्यक्रम में आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव डॉ. के. के. निराला भी उपस्थित थे। श्री हरिवंश ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को रेखांकित करते हुए इस दिशा में संचार, शोध एवं नवाचार की आवश्यकताओं पर बल दिया।

आईआईएमसी की कुलपति डॉ.गौड़ ने 'संचार माध्यम' जहाँ पत्रकारिता की उभरती हुई नवीन प्रवृत्तियों पर सतत नजर रखता है, वहीँ भारतीय ज्ञान परंपरा में से कुछ बिखरे हुए मोतियों को संकलित कर उन्हें आधुनिक प्रवृत्तियों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने में भी पीछे नहीं रहता।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित