सहारनपुर , जून 25 -- उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा घोषित नई टीम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विशेष प्रतिनिधित्व दिए जाने से क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। नई कार्यकारिणी में पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ गुर्जर नेता नवाब सिंह नागर को पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा सत्यपाल सैनी और शामली के युवा नेता मोहित बेनीवाल को भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। बसंत त्यागी को प्रदेश मंत्री का दायित्व दिया गया है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने नई नियुक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुरेश राणा सहित सभी पदाधिकारी नई जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेंगे।

राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि युवा मोर्चा की कमान रोहित मिश्रा को सौंपे जाने के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने आगामी चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, गुर्जर और राजपूत समुदाय चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन समुदायों से जुड़े प्रभावशाली नेताओं को संगठन में प्रमुख स्थान देकर भाजपा ने अपने सामाजिक आधार को और मजबूत करने का संकेत दिया है।

पूर्व मंत्री सुरेश राणा ने अपनी नियुक्ति पर पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह भाजपा के अनुशासित कार्यकर्ता हैं और उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका पूरी निष्ठा, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में भाजपा ने युवा नेता अजीत सिंह राणा को सहारनपुर का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां देकर संगठन को और मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठनात्मक मजबूती के साथ सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। नई नियुक्तियों को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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