अमृतसर , सितंबर 25 -- मिरी-पीरी खालसा मार्च शुक्रवार को गुरुद्वारा जन्म स्थान बाबा बुड्ढा साहिब, कथूनंगल से जयकारों की गूंज के बीच श्री अकाल तख्त साहिब के लिए रवाना हुआ। इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित प्रमुख हस्तियां और बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि मार्च के दौरान पंजाब के हजारों गांवों और शहरों में संगत से सीधा संवाद हुआ और बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लिया। उन्होंने कहा कि मार्च का मुख्य उद्देश्य संगत को श्री गुरु ग्रंथ साहिब, गुरमत विचारधारा और श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता के सिद्धांत से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना, खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा मेहनत के लिए प्रेरित करना भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में युवाओं ने केस रखने, नशे से दूर रहने और गुरु साहिब के सिद्धांतों के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लिया।
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि मार्च की समाप्ति के बाद अगले चरण में एसजीपीसी के प्रत्येक हलके में गुरमत समागम और अमृत संचार कार्यक्रमों को तेज किया जाएगा। उन्होंने एसजीपीसी सदस्यों से अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक संगत को गुरमत से जोड़ने और अमृत संचार के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी मार्च की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ने में सहायक होंगे।
इस अवसर पर धार्मिक दीवान आयोजित हुआ, जिसमें रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन किया। ज्ञानी परविंदरपाल सिंह ने कथा-विचार किया। पांच प्यारों और निशानची सिंहों को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। विभिन्न पड़ावों पर संगत ने मार्च का स्वागत किया और लंगर लगाये गये।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित