बड़वानी , फरवरी 17 -- मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में पले-बढ़े 58 वर्षीय नागेंद्र शर्मा आज मिनी इंडिया कहे जाने वाले मॉरीशस में भारतीय सनातन परंपराओं के सशक्त वाहक के रूप में पहचान बना चुके हैं। उनके साथ करीब 30 भारतीय मूल के कथावाचक आचार्य वहां धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय हैं।
इतिहास के अनुसार वर्ष 1834 के बाद गिरमिटिया श्रमिकों के रूप में लगभग चार लाख भारतीयों को मॉरीशस ले जाया गया था। वे अपने साथ भाषा, रीति-रिवाज, धार्मिक ग्रंथ और परंपराएं भी लेकर गए। आज मॉरीशस की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी भारतीय मूल की है, जिनमें लगभग 52 प्रतिशत हिंदू हैं। यही कारण है कि इस द्वीप देश को मिनी इंडिया भी कहा जाता है।
मॉरीशस में समय-समय पर कई प्रमुख संतों और गुरुओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। स्वामी विश्वानंद ने भक्ति मार्ग की स्थापना कर वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाया। शिवाया सुब्रमण्यम स्वामी ने हिंदू धर्म के पुनर्जागरण में योगदान दिया, जबकि स्वामी वेंकटशानंद ने डिवाइन लाइफ सोसाइटी की स्थापना की। मां आनंदमयी और स्वामी चिन्मयानंद जैसे संतों ने भी वहां आध्यात्मिक प्रभाव छोड़ा।
रोज बेल में निवासरत नागेंद्र शर्मा उन 'ऑलराउंडर' कथा वाचकों में शामिल हैं, जो कर्मकांड, अनुष्ठान, कथा वाचन और पारिवारिक मार्गदर्शन जैसी बहुआयामी भूमिकाएं निभाते हैं। उन्होंने बताया कि व्यवसाय छोड़ने के बाद नर्मदा तट सहित विभिन्न आध्यात्मिक स्थलों पर साधना की और वर्ष 2007 में गणेश मंदिर की स्थापना के उद्देश्य से मॉरीशस पहुंचे। अनुकूल वातावरण मिलने पर वहीं स्थायी रूप से बस गए। वे कई यूरोपीय देशों में भी भागवत कथा का वाचन कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि मॉरीशस में हिंदू त्योहारों के दौरान विशेष अनुशासन का पालन किया जाता है और अनेक श्रद्धालु मांसाहार का त्याग करते हैं। उनके अनुसार युवा पीढ़ी भी पारंपरिक मूल्यों को अपनाने में रुचि दिखा रही है। नागेंद्र शर्मा ने सेंधवा में मां बगलामुखी मंदिर क्षेत्र की स्थापना भी की है और प्रतिवर्ष वहां आते हैं।
मॉरीशस के प्रमुख तीर्थ गंगा तलाव के पूर्व आचार्य शंभू नाथ पांडे ने बताया कि वहां पुजारियों को ऑलराउंडर माना जाता है। उनसे कर्मकांड, ज्योतिष परामर्श, कथा वाचन और सामाजिक मार्गदर्शन जैसी सभी भूमिकाएं निभाने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आचार्य विपिन बिहारी मिश्रा और बलदाऊ मिश्रा के योगदान का भी उल्लेख किया।
आचार्य राजेंद्र राय मिश्रा ने बताया कि स्वर्गीय पंडित राजेंद्र अरुण, जिन्हें आधुनिक तुलसीदास कहा जाता है, ने रामचरितमानस को रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से लोकप्रिय बनाया। मॉरीशस में लगभग 350 मंदिर मॉरीशस सनातन धर्म मंदिर परिषद के अंतर्गत संचालित होते हैं।
हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन चंद्र रामगुलाम की भारत यात्रा के दौरान अयोध्या और वाराणसी भ्रमण ने दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया है। गंगा तलाव से लेकर रामायण सेंटर तक और नागेंद्र शर्मा जैसे कथा वाचकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय गुरुओं तक, मॉरीशस और भारत के बीच आस्था की यह डोर आज भी अटूट बनी हुई है। यह संबंध केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है।
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