आइजॉल , अक्टूबर 21 -- मिजोरम में इस वर्ष मादक पदार्थों के सेवन से होने वाली मौतों में तेजी से इजाफा हुआ है।
राज्य आबकारी एवं मादक पदार्थ विभाग के मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 16 अक्टूबर के बीच 73 मौतें दर्ज की गयीं जो पिछले वर्ष हुयी 67 मौतों की तुलना में अधिक हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मृतकों में 64 पुरुष और नौ महिलायें शामिल हैं, जिनमें से 27 मौतें केवल हेरोइन के सेवन के कारण हुयी, जबकि 46 मौतें अन्य मादक पदार्थों, मुख्य रूप से दवाओं के साथ हेरोइन का सेवन करने से हुयी।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह प्रवृत्ति बहु-औषधि उपयोग के बढ़ते खतरे को दर्शाती है, यह एक ऐसा पैटर्न है, जिसमें आसानी से उपलब्ध औषधीय दवाओं के साथ मादक पदार्थों का मिश्रण शामिल है।
विभाग के रिकॉर्ड एक गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। मिज़ोरम में 1984 में हेरोइन से जुड़ी पहली मौत हुयी थी और तब से राज्य में मादक पदार्थों से संबंधित 1,952 मौतें हुयी हैं जिनमें 1,714 पुरुष और 238 महिलायें शामिल हैं।
इनमें से बड़ी संख्या में 1,161 लोगों की मौतें स्पास्मो प्रोक्सीवॉन और पार्वोन स्पा के कारण हुईं, जो कभी लोकप्रिय दर्द निवारक दवायें थीं, लेकिन केन्द्र सरकार ने 2000 के दशक में इन्हें प्रतिबंधित कर दिया था। प्रतिबंध के बावजूद उनकी उपलब्धता मिज़ोरम में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में एक बड़ी बाधा बनकर उभर रही है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार दशकों में अकेले हेरोइन से 299 लोगों की मौत हुई हैं, जबकि 492 अन्य मौतें हेरोइन और अन्य दवाओं के मिश्रण से हुई हैं।
अधिकारियों ने कहा कि राज्य में जागरूकता अभियान जारी है और प्रवर्तन अभियान तेज किये जा रहे हैं, लेकिन मौतों की बढ़ती संख्या मिजोरम के सामाजिक ताने-बाने में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की गहरी पकड़ को दर्शाती है।
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