आइजोल , अगस्त 02 -- मिजोरम के लावंगतलाई जिले में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत सुनवाई के दौरान कथित तौर पर शराब के नशे में पाये जाने के बाद एक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को तत्काल वापस बुला लिया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी को एसआईआर से जुड़े दावों और आपत्तियों की सुनवाई के लिए बोरापानसुरी गांव भेजा गया था, लेकिन वह मौके पर नशे की हालत में मिले और इस वजह से वह अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ थे।
घटना के समय स्थानीय निवासी और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय संगठनों ने अधिकारी की स्थिति की पुष्टि की और इसकी सूचना जिला प्रशासन, चुनाव अधिकारियों और 'यंग मिजो एसोसिएशन' (वाईएमए) की केंद्रीय समिति को दी।
घटना के बाद लावंगतलाई के उपायुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) डॉनी लालरुआतसांगा ने अधिकारी को तुरंत जिला मुख्यालय वापस बुलाने का आदेश दिया। डीईओ ने अधिकारी द्वारा बोरापानसुरी और अन्य गांवों में की गयी दावों एवं आपत्तियों की सभी सुनवाइयों को रद्द कर दिया और चुनावी पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नये सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया।
सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की उम्मीद है और चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद उन्हें निलंबित किया जा सकता है। बोरापानसुरी और आसपास के गांव भारत-बंगलादेश सीमा पर स्थित हैं और संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। नागरिक समाज संगठनों और छात्र निकायों ने चार जुलाई को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में कई सीमावर्ती मतदान केंद्रों में मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि पर बार-बार चिंता जतायी है।
इस बीच, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों ने एसआईआर प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए प्रयास भी तेज कर दिये हैं।
मिजो ज़िरलाई पॉल (एमज़ेडपी) द्वारा बुलायी गयी बैठक में शुक्रवार को पांच राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया कि मिजोरम में हर वैध मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
दलों ने इस बात पर सहमति जतायी कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान किसी भी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता अयोग्य लोगों को मतदाता सूची में शामिल कराने में मदद न करे।
बैठक में फर्जी दस्तावेजों के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के प्रयासों की कड़ी निंदा की गयी और फैसला लिया गया कि ऐसे मामलों की तुरंत सक्षम अधिकारियों को रिपोर्ट की जाये।
प्रतिभागियों ने एसआईआर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों से लगन और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया और लापरवाही या कर्तव्य में ढिलाई के दोषी पाये जाने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आग्रह किया।
मानसून के मौसम के कारण आ रही व्यावहारिक चुनौतियों, विशेषकर दूरदराज के इलाकों को ध्यान में रखते हुए, बैठक में सीईओ कार्यालय से दावों और आपत्तियों की सुनवाई की अंतिम तिथि चार अगस्त से आगे बढ़ाने का अनुरोध करने का भी निर्णय लिया गया।
बैठक में सत्तारूढ़ ज़ोराम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम), मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), मिज़ोराम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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