नयी दिल्ली , जुलाई 07 -- केंद्र सरकार ने मिजोरम विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय को जैव विविधता अधिनियम 2002 के तहत देश का 21वां नामित जैव संग्रह भंडार (डिज़िग्नेटेड रिपॉजिटरी) घोषित किया है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की सिफारिश पर गत 19 जून को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस निर्णय से देश में जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण तथा अनुसंधान संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

मंत्रालय के अनुसार, नामित भंडार में चयनित वनस्पतियों तथा सरीसृपों, उभयचरों, मछलियों, पतंगों, बीटल और तितलियों सहित विभिन्न जीवों के प्रमाणित जैविक नमूनों का संरक्षण किया जाएगा। इसके अलावा, क्षेत्र में खोजी जाने वाली नई प्रजातियों के मूल नमूने भी यहां सुरक्षित रखे जाएंगे, जिससे प्रजातियों की पहचान, वैज्ञानिक अनुसंधान और दीर्घकालिक संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्राकृतिक आपदाओं, आवास के नष्ट होने या प्रजातियों में गिरावट की स्थिति में भी ये संग्रह संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्यों में उपयोगी होंगे।

वर्ष 2022 में स्थापित यह संग्रहालय इंडो-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट में स्थित है, जहां 7,500 से अधिक पुष्पीय पौधों और 2,000 से अधिक जीव प्रजातियों का निवास है। संग्रहालय में अब तक 500 से अधिक जैव विविधता नमूनों का संग्रह एवं संरक्षण किया जा चुका है तथा विभिन्न वर्गीकरण समूहों के विशेषज्ञ यहां कार्यरत हैं। यह संस्थान मिजोरम राज्य जैव विविधता बोर्ड और क्षेत्रीय शोध संस्थानों के साथ मिलकर जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण को नई गति देगा।

मंत्रालय ने कहा कि यह कदम भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना (2024-2030) के तहत जैव विविधता संरक्षण और आनुवंशिक विविधता के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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