आइजोल , अक्टूबर 25 -- मिजोरम ने दशकों पुराने सीमा विवाद को लेकर असम के साथ अगले दौर की आधिकारिक वार्ता के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया है।

गृह मंत्री के सपडांगा ने रविवार को कहा कि यह वार्ता मध्य नवंबर में आइजोल में होने की संभावना है।

श्री सपडांगा ने बताया कि राज्य सरकार को असम की ओर से पुष्टि का इंतजार है, जिसने प्रस्तावित कार्यक्रम पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वार्ता के दौरान विवादित सीमा के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। इसके लिए मिजोरम के गृह विभाग ने तीन दिवसीय विचार-विमर्श का प्रस्ताव दिया है, जो जरूरी नहीं कि लगातार दिनों में ही हो।

मिजोरम प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह सचिव वनलालमाविया द्वारा किए जाने की संभावना है, जबकि असम के अपने सीमा सुरक्षा और विकास विभाग से किसी वरिष्ठ अधिकारी को नामित करने की उम्मीद है। यह प्रस्तावित बैठक एक वर्ष से भी अधिक समय बाद आधिकारिक स्तर की वार्ता को फिर से शुरू करने की दिशा में एक कदम होगी।

पिछली बार यह बैठक 25 अप्रैल 2025 को गुवाहाटी में हुई थी। तब दोनों राज्यों के अधिकारियों ने अपनी 164.6 किलोमीटर लंबी साझा सीमा से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की थी। उन चर्चाओं का उद्देश्य आगामी मंत्री स्तरीय वार्ताओं के लिए जमीन तैयार करना था।

मिजोरम के गृह विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों सरकारें जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने पर सहमत थीं, लेकिन इस वर्ष अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों और अन्य वजहों से मामला टलता चला गया।

दोनों राज्यों के बीच यह पूरा विवाद सीमा के ऐतिहासिक सीमांकन को लेकर आमने-सामने के दावों पर टिका है।

मिजोरम का रुख साफ है कि 'बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873' के तहत 1875 में तय किए गए 'इनर लाइन रिजर्व्ड फॉरेस्ट' (आईएलआरएफ) का 509 वर्ग मील का इलाका ही उसकी असली और संवैधानिक सीमा है।

दूसरी तरफ, असम सर्वेक्षण विभाग के 1933 वाले नक्शे को ही अपनी जायज सीमा मानता है।

तमाम बैठकों और सीमा पर शांति कायम करने की कोशिशों के बावजूद यह पुराना सीमा विवाद दशकों से अटका हुआ है।अगस्त 2021 के बाद से दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के बीच आधिकारिक वार्ताओं और ऑनलाइन बैठकों के अलावा चार बार मंत्री स्तरीय बातचीत भी हो चुकी है।

बातचीत के इस सिलसिले में तेजी 26 जुलाई 2021 को आई, जब असम सीमा से सटे मिजोरम के कोलासिब जिले में स्थित वैरेंगते शहर के बाहरी इलाके में दोनों राज्यों की पुलिस आपस में भिड़ गई थी।

इस खूनी संघर्ष और दोनों तरफ से हुई गोलीबारी ने इस पुराने विवाद को बेहद खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया, जिसके बाद दोनों पक्षों को मेज पर लाने की नए सिरे से पहल हुई।

इसके बाद अगस्त 2021 में असम ने पहल की। असम के सीमा सुरक्षा और विकास मंत्री अतुल बोरा एक प्रतिनिधिमंडल लेकर आइजोल पहुंचे और मिजोरम के तत्कालीन गृह मंत्री लालचमलियाना की टीम के साथ वार्ता की।

तभी से मंत्री और अधिकारी स्तर पर वार्ताओं का दौर जारी है, ताकि सीमा दावों से जुड़ी रोजमर्रा की प्रशासनिक दिक्कतों को सुलझाते हुए एक टिकाऊ और सर्वमान्य हल निकाला जा सके।

नवंबर के मध्य में होने वाली यह प्रस्तावित बैठक इसी शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए है, हालांकि इसकी अंतिम तारीखें मिजोरम के प्रस्ताव पर असम की हरी झंडी के बाद ही तय होंगी।

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