आइज़ोल , जुलाई 30 -- मिजोरम में चर्चों के संगठन काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिज़ोरम ने संसद के मौजूदा मानसून सत्र में संभावित तौर पर प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक या एफसीआरए संशोधन विधेयक के खिलाफ 11 अगस्त को यहां एक बड़े विरोध मार्च की घोषणा की है। काउंसिल का आरोप है कि इस प्रस्तावित कानून के लागू होने से गिरजाघरों और स्वयंसेवी संगठनों के कामकाज पर बुरा असर पड़ सकता है।
गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए काउंसिल सीसीएम के नेताओं ने प्रस्तावित कानून को लेकर मिज़ोरम सरकार के ढुलमुल रवैये पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शायद इस मुद्दे की गंभीरता को पूरी तरह से नहीं समझ पा रही है, क्योंकि इसके सीधे परिणाम उसे नहीं भुगतने पड़ेंगे, जबकि विदेशी दान प्राप्त करने वाले गिरजाघर और धर्मार्थ संगठन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस विधेयक को वापस नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा।
सीसीएम के अनुसार, यह विरोध मार्च 11 अगस्त को पूर्वाह्न 10:30 बजे ज़ारकावत और सिकुलपुईकॉन से एक साथ शुरू होगा, जो ज़ारकावत के वनापा हॉल में एकत्र होगा, जहां एक जनसभा आयोजित की जाएगी। काउंसिल ने अपने सदस्य चर्चों के अलावा अन्य संप्रदायों, गैर-सरकारी संगठनों और इस विधेयक का विरोध करने वाले सभी नागरिकों को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
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