आइजोल , अगस्त 27 -- मिजोरम के गृह मंत्री के. सपडांगा ने गुरुवार को राज्य विधानसभा को बताया कि 2024 से अब तक लगभग पांच लाख इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी किए हैं, जिनमें से 2.15 लाख से ज़्यादा परमिट बैराबी-साइरंग रेलवे लाइन खुलने के बाद की अवधि में दिए गए।
विधानसभा में सवालों के लिखित जवाब में श्री सपडांगा ने कहा कि राज्य सरकार ने 2024 और जुलाई 2026 के बीच 4,94,033 आईएलपी जारी किए।
इनमें से 2,15,946 परमिट सितंबर 2025 और जुलाई 2026 के बीच जारी किए गए, जो पिछले साल सितंबर में साइरंग रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के बाद हुए। इससे पता चलता है कि देश के बाकी हिस्सों से मिज़ोरम तक राज्य का पहला रेल सम्पर्क चालू होने के बाद लोगों के आने-जाने में काफी बढ़ोतरी हुई है।
मंत्री ने कहा कि मिज़ोरम के बाहर के 13,730 गैर-आदिवासी लोग अभी वैध परमिट के साथ राज्य में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।
साथ ही सरकार ने बिना इजाज़त घुसने और तय समय से ज़्यादा रुकने वालों के खिलाफ़ कार्रवाई तेज़ कर दी है। श्री सपडांगा के अनुसार, इस साल 934 लोगों को बिना आईएलपी या अन्य वैध यात्रा दस्तावेज़ों के मिज़ोरम में घुसने के आरोप में पकड़ा गया।
मंत्री ने कहा कि जो लोग परमिट खत्म होने के बाद भी राज्य में रहते हैं, उनके खिलाफ़ ईस्टर्न बंगाल फ्रंटियर रेगुलेशन (ईबीएफआर), 1873 के तहत पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
ऐसे मामलों को बाद में ज़िला अदालतों के सामने रखा जाता है, जो यह तय करती हैं कि दोषियों पर जुर्माना लगाया जाए या उन्हें मिज़ोरम से वापस भेजा जाए।
आईएलपी सिस्टम के तहत राज्य के बाहर के लोगों, खासकर गैर-आदिवासी नागरिकों को मिज़ोरम में घुसने से पहले इजाज़त लेनी पड़ती है। यह परमिट एक यात्रा दस्तावेज़ है जो उन भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है जो ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू किए गए बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत संरक्षित क्षेत्रों में जाना चाहते हैं।
रेलवे संपर्क चालू होने के बाद से आईएलपी जारी करने में हुई भारी बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब मिज़ोरम के अधिकारी राज्य में लोगों की बढ़ती आवाजाही पर नज़र रख रहे हैं और उसे नियंत्रित कर रहे हैं।
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