भोपाल , अक्टूबर 22 -- भोपाल मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप के विरोध में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में गुरुवार को विभिन्न आवासीय क्षेत्रों के रहवासियों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) कार्यालय पहुंचकर हजारों आपत्तियां दर्ज कराईं। रहवासियों ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण, बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रस्तावों पर चिंता जताते हुए प्रारूप में संशोधन की मांग की।
समिति ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित प्रावधानों से सुनियोजित आवासीय क्षेत्रों का मूल स्वरूप प्रभावित हो सकता है। समिति के अनुसार, अरेरा कॉलोनी सहित विभिन्न इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने और मार्केट स्ट्रीट जैसे प्रावधानों से यातायात, पार्किंग, प्रदूषण तथा नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। समिति ने मांग की कि अनधिकृत निर्माणों और अवैध भू-उपयोग को नियमित करने के बजाय नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
गुरुवार को अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़िया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्तिनगर, शाहपुरा, कोलार रोड, नेहरू नगर और अन्य क्षेत्रों के रहवासी आपत्तियां दर्ज कराने पहुंचे। इनमें पूर्व आईएएस अधिकारी कविन्द्र कियावत, अरुण गुर्टू, पवन जैन, याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी सहित कई नागरिक एवं विभिन्न रहवासी समितियों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि विकास योजना के बिंदु 15.38 में आवासीय परिसरों में संचालित कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह प्रावधान न्यायालयीन आदेशों के विपरीत है और इससे अनधिकृत निर्माणों को संरक्षण मिलने की आशंका है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रारूप में आवश्यक सुधार नहीं किए जाते, समिति इसका विरोध जारी रखेगी।
समिति ने भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुरूप फुटपाथ, सर्विस रोड और पार्किंग की व्यवस्था करने तथा स्वीकृत अभिन्यास के अनुसार पार्कों, खुले स्थानों और हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखने की मांग की। समिति ने प्रारूप में RG-3 क्षेत्र की परिभाषा और मिश्रित भूमि उपयोग संबंधी प्रावधानों में स्पष्टता लाने, अरेरा कॉलोनी के E-1 से E-5 तक के आवासीय स्वरूप को बनाए रखने तथा आवासीय सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति से जुड़े प्रावधानों को हटाने का आग्रह किया।
रहवासियों ने पश्चिमी बायपास, बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण तथा फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में वृद्धि से संबंधित प्रावधानों पर भी पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि अनियोजित शहरीकरण से जलस्रोतों, हरियाली और वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। समिति ने यातायात व्यवस्था, फुटपाथ निर्माण, सार्वजनिक सुविधाओं और भविष्य की परिवहन जरूरतों के लिए ठोस योजना बनाने पर भी जोर दिया।
समिति ने प्रारूप की प्रतियों में तकनीकी एवं भाषाई खामियों का आरोप लगाते हुए हिंदी और अंग्रेजी में स्पष्ट तथा सुपाठ्य दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही सभी आपत्तियों पर पारदर्शी तरीके से विचार करने और आपत्तिकर्ताओं को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने का आग्रह किया। समिति का कहना है कि भोपाल का विकास पर्यावरण संरक्षण, जलस्रोतों की सुरक्षा, कानून के पालन और नागरिकों के जीवन के अधिकार को प्राथमिकता देकर किया जाना चाहिए।
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