भोपाल , सितंबर 11 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने शुक्रवार को रोशनपुरा चौराहे पर 31 घंटे का उपवास शुरू किया। उनके साथ पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, अरुणेश्वर शरण सिंह देव, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के पास अपने कार्यालय के मास्टर प्लान और उसके ऊपर हेलीपैड बनाने की योजना के लिए समय है, लेकिन भोपाल का मास्टर प्लान लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान वर्ष 1995 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार के समय लागू हुआ था। नियम के अनुसार हर 10 वर्ष में मास्टर प्लान आना चाहिए, लेकिन वर्ष 2005 के बाद इसे लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार के दौरान वर्ष 2031 का मास्टर प्लान तैयार कर छह-सात मार्च 2020 को प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया होनी थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इसे लागू नहीं किया।
शर्मा ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान लागू होने से आम नागरिकों को आवासीय निर्माण, व्यवसाय और अन्य गतिविधियों के लिए तय नियमों के तहत अनुमति मिल जाएगी और नेताओं तथा दलालों के माध्यम से अनुमति दिलाने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसी कारण मास्टर प्लान लंबित रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भोपाल के बाहरी क्षेत्रों में अव्यवस्थित विकास हो रहा है। मास्टर प्लान लागू होने पर ग्रीन बेल्ट, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों की स्पष्ट व्यवस्था होगी तथा राजधानी का विकास व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
शर्मा ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर की जा रही सीलिंग की कार्रवाई पर व्यापारियों को राहत देने के लिए मिक्स लैंडयूज की अनुमति देने और नए व्यावसायिक क्षेत्र तथा बाजार विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने न्यू मार्केट और एमपी नगर जैसे बाजार विकसित किए थे।
भाजपा और आरएसएस के कार्यालयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यालय ई-2 और आरएसएस का कार्यालय अरेरा कॉलोनी ई-2 में है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमों के उल्लंघन पर बुलडोजर चलाया जा रहा है तो इन कार्यालयों और वहां होने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि सभी के लिए नियम समान होने चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई से व्यवसाय और व्यापार पर निर्भर लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से करीब पांच लाख लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं करने और मास्टर प्लान लागू कर व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने की मांग की।
उन्होंने 15 सितंबर को उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की ओर से व्यापारियों के पक्ष में कोई ठोस प्रस्ताव या तैयारी दिखाई नहीं दे रही है। शर्मा ने कहा कि उनकी मांग है कि मास्टर प्लान लागू किया जाए और भोपाल का व्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जाए।
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