भोपाल , अक्टूबर 23 -- भोपाल मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप पर आपत्तियां दर्ज कराने शुक्रवार को शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय के सामने व्यापारी पहुंचे। व्यापारियों ने व्यावसायिक भू-उपयोग, एफएआर, कन्वर्जन फीस और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताते हुए कन्वर्जन फीस एकमुश्त कुल पांच प्रतिशत निर्धारित करने, शुल्क जमा करने पर पूरा व्यावसायिक एफएआर देने तथा पुराने बाजारों को राहत देने की मांग की। वहीं, भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान भी मास्टर प्लान के प्रारूप के विरोध में आपत्तियां दर्ज कराने पहुंचेंगे।
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने से उनकी निजी जमीन, खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा के अनुसार, किसान कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव के विरोध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इससे पहले गुरुवार को नीलबड़ में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया था।
किसानों ने मांग की है कि कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने से पहले उनके अधिकारों और समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना है कि वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का उपयोग कृषि निर्धारित था और पूर्व में निरस्त किए गए वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के प्रारूप में भी कृषि उपयोग का प्रावधान था। किसानों ने नए प्रारूप में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव और भोजताल संरक्षण जोन-1 तथा जोन-2 को लेकर भी आपत्ति जताई है। वे इन जोन को हटाकर कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
मास्टर प्लान के प्रारूप में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम लोगों के मकानों वाले क्षेत्रों में निर्माण पर रोक के बीच कुछ प्रभावशाली लोगों के बंगले और फार्म हाउस वाले क्षेत्रों में निर्माण की सीमा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित नियमों, निर्माण अनुमतियों और भूमि अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मेंडोरी गांव के केरवा वुड्स क्षेत्र में कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर तीन करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। वहीं, कैचमेंट क्षेत्र में कृषि उपयोग वाली श्रेणी के करीब 40 हजार मकानों में लगभग तीन लाख लोगों के रहने का दावा किया गया है। इस स्थिति में मास्टर प्लान के प्रावधानों से प्रभावित होने वाले मकानों की कानूनी स्थिति और संभावित कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने के बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित