भोपाल , अक्टूबर 22 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के मास्टर प्लान के नए प्रारूप में 66 गांवों की कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के प्रस्ताव के विरोध में गुरुवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। मुगालिया छाप से पदयात्रा कर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराने आ रहे किसानों को पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके विरोध में किसान सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित मास्टर प्लान में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने से हजारों किसानों की खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है।
किसान भोजताल इन्फ्लुएंस जोन-1 (बीआईजेड-1) और जोन-2 (बीआईजेड-2) को हटाने तथा कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं। किसान अनोखी सिंह पटेल ने कहा कि खेती ही ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। वहीं किसान सजल जैन ने आरोप लगाया कि पहले कैचमेंट जोन के नाम से पहचाने जाने वाले क्षेत्र को अब भोजताल इन्फ्लुएंस जोन नाम दिया गया है।
संयुक्त किसान मोर्चा के मनोहर सिंह ठाकुर के अनुसार, भोपाल और सीहोर के करीब 150 गांवों की जमीन पर लगे प्रतिबंधों का विरोध वर्ष 2008 से किया जा रहा है। किसानों ने दावा किया कि वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में इन जमीनों का उपयोग कृषि के लिए निर्धारित था। उन्होंने आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर से एक माह आगे बढ़ाने की मांग भी की है, ताकि सभी प्रभावित किसान अपनी बात रख सकें।
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की सहायक संचालक इंदु त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार मास्टर प्लान के प्रारूप पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। प्रकाशन की तारीख से पूरी प्रक्रिया के लिए अधिकतम 90 दिन की समय-सीमा निर्धारित है।
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