बालोद , जनवरी 23 -- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मटिया (अर्जुंदा) गांव की नौवीं कक्षा की छात्रा हेमाद्री चौधरी को उनके अदम्य साहस और मानवता की मिसाल पेश करने के लिए राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें 26 जनवरी को रायपुर में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किया जाएगा।
राज्य शासन द्वारा सम्मान स्वरूप छात्रा को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि, प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान किया जाएगा।
यह घटना पिछले साल दो अक्टूबर की है, जब ग्राम मटिया स्थित तालाब में पहली कक्षा का छह वर्षीय छात्र ईशान यादव डूब गया था। तालाब के पास मौजूद लोगों ने मदद करने से इनकार कर दिया लेकिन उस समय हेमाद्री ने बिना किसी झिझक के अपनी जान की परवाह किए बिना तालाब में छलांग लगा दी। करीब सात फुट गहरे पानी और दलदली तल के कारण बच्चे को ढूंढना बेहद मुश्किल था लेकिन साहस और सूझबूझ से हेमाद्री ने ईशान को खोजकर बाहर निकाला और प्राथमिक प्रयासों से उसके शरीर से पानी बाहर निकाला।
ईशान को पहले निजी चिकित्सक, फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अर्जुंदा ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर भिलाई के शंकराचार्य जुनवानी अस्पताल रेफर किया गया। आईसीयू में लगभग एक सप्ताह इलाज के बाद ईशान पूरी तरह स्वस्थ हो सका।
डॉक्टरों के अनुसार बच्चे के फेफड़ों में पानी भर चुका था और यदि दो मिनट की भी देरी होती तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
इस साहसिक घटना को दैनिक अखबारों ने 14 नवंबर 2025 (बाल दिवस) के अवसर पर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद परिजनों और विद्यालय प्रबंधन ने समाचार कटिंग के साथ राज्य शासन को आवेदन प्रस्तुत किया।
प्रदेशभर से प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने हेमाद्री के साहसिक और प्रेरणादायक कार्य को मान्यता देते हुए राज्य वीरता पुरस्कार 2025 के लिए चयन किया।
इससे पहले छात्रा को ग्रामीणों, विद्यालय प्रबंधन एवं स्थानीय स्तर पर विभिन्न मंचों से सम्मानित किया जा चुका है। जिले के लिए गौरव का क्षण महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बालोद जिले से इस वर्ष राज्य वीरता पुरस्कार के लिए केवल एक छात्रा का चयन हुआ है, जो पूरे जिले के लिए गर्व की बात है।
ईशान की मां प्रीति यादव ने कहा कि यदि हेमाद्री उस दिन साहस न दिखाती, तो उनका बेटा आज जीवित नहीं होता। उन्होंने कहा कि एक नाबालिग छात्रा ने जो हिम्मत दिखाई, वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
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