भोपाल , मार्च 19 -- राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि 20 मार्च को होने वाली मार्च इक्विनॉक्स की खगोलीय घटना को लेकर प्रचलित धारणाएं पूरी तरह सही नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि आमतौर पर इसे दिन और रात बराबर होने की घटना माना जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि दिन और रात लगभग 5 दिन पहले ही बराबर हो चुके होते हैं। यह संतुलन "इक्वीलक्स" कहलाता है, जबकि मार्च इक्विनॉक्स में सूर्य की दिशा विशेष रूप से सटीक होती है।

सारिका के अनुसार 20 मार्च को भारतीय समयानुसार शाम 8 बजकर 16 मिनट पर सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक लंबवत होगा। इस दिन सूर्य ठीक पूर्व दिशा से उदित होकर ठीक पश्चिम दिशा में अस्त होगा, जो साल में केवल दो बार होने वाली घटना है।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी की धुरी लगभग 23.4 डिग्री झुकी होने के कारण वर्ष भर सूर्य की स्थिति उत्तर और दक्षिण की ओर बदलती रहती है। मार्च और सितंबर में सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है, जिससे यह संतुलन देखने को मिलता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश लोग इसे 21 मार्च की घटना मानते हैं, जबकि यह 20 या 21 मार्च को हो सकती है और इस वर्ष यह 20 मार्च को घटित हो रही है। अगली बार ऐसी स्थिति 23 सितंबर 2026 को देखने को मिलेगी।

उन्होंने कहा कि खगोलशास्त्र में इस क्षण को "फर्स्ट प्वाइंट ऑफ एरीज" कहा जाता है, जो गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बिंदु है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में इस दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में मामूली अंतर के साथ लगभग 12 घंटे का दिन रहेगा, जबकि 15 मार्च के आसपास दिन-रात का वास्तविक संतुलन पहले ही बन चुका होता है।

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