चंडीगढ़ , जून 08 -- पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य में जमीनी स्तर पर शासन में जनता की भागीदारी बढ़ाने और कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 21 समुदायों के लिए जिला और विधानसभा क्षेत्र स्तर पर कल्याण बोर्डों का गठन किया है।
सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक विभाग ने कई अधिसूचनाएं जारी कर इस फैसले की मंजूरी दी। ये नये बोर्ड पंजाब के सभी 23 जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों में काम करेंगे। इन्हें बनाने का मकसद पहले से काम कर रहे राज्य-स्तरीय कल्याण बोर्डों की मदद करना है, ताकि अपने-अपने समुदायों की जरूरतों और विकास को लेकर जमीनी जानकारी और फीडबैक सरकार तक सीधे पहुंचाया जा सके।
इस पहल के तहत राय सिख, राजपूत, बैरागी, ब्राह्मण, विमुक्त जाति, प्रजापत समाज, रामगढ़िया, सैनी, स्वर्णकार, मसीह, मुस्लिम विकास, सूफी संत समाज, अग्रवाल, कनौजिया, कम्बोज, खत्री अरोड़ा, बाजीगर-टपरीवास, गुज्जर और अन्य समुदायों को शामिल किया गया है।
अधिसूचना के मुताबिक, जिला और निर्वाचन क्षेत्र स्तर के ये बोर्ड अपने समुदायों के विकास के लिए खास प्रस्ताव तैयार करेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं के असर को लेकर फीडबैक देंगे, लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए सरकार को सलाह देंगे और जमीनी स्तर पर उन मुद्दों को उठाएंगे जिनमें सरकारी नीतियों में बदलाव की जरूरत है।
ये बोर्ड सरकार और स्थानीय जनता के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेंगे। इससे जनकल्याणकारी योजनाओं की बेहतर निगरानी हो सकेगी और यह पक्का किया जा सकेगा कि सरकारी लाभ सही मायने में जरूरतमंदों तक पहुंचे। इस कदम का एक उद्देश्य विकास कार्यों की योजना बनाने और उन्हें पूरा करने में जनता की भागीदारी बढ़ाना भी है।
इस फैसले का स्वागत करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के एक प्रवक्ता ने पंचकूला में कहा कि पंजाब सरकार ने एक बार फिर सबको साथ लेकर चलने और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। उन्होंने कहा कि जिला और क्षेत्र स्तर पर इन बोर्डों के बनने से आम लोगों को अपनी परेशानियां और विकास की जरूरतें सीधे सरकार के सामने रखने का मौका मिलेगा।
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