फाजिल्का , अगस्त 24 -- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के परिवार से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की।

श्री चुघ ने श्री मान के परिवार से जुड़े एक दुष्कर्म मामले में लगाये गये कथित रिश्वत के गंभीर आरोपों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मामले में कथित तौर पर आरोपी को बचाने के लिए रिश्वत मांगने के आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

श्री चुघ ने कहा कि सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा लगाये गये आरोपों को वापस लेने के लिए कथित तौर पर सरकारी मशीनरी के माध्यम से दबाव बनाये जाने की खबरें भी गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या आरोप लगाने वाले व्यक्ति पर दबाव डालना कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिदेशक से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा, "सच सामने आना चाहिए। सबूतों से छेड़छाड़, जांच को प्रभावित करने या पीड़िता की आवाज दबाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"उन्होंने फाजिल्का नगर परिषद की नवनियुक्त अध्यक्ष अनीता झैरथ के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल होकर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अनीता झैरथ का नगर परिषद की पहली महिला अध्यक्ष बनना फाजिल्का के लिए गौरव की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी से अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए शहर के विकास और जनसेवा को नई दिशा देंगी।

श्री चुघ ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर सरकारी कर्मचारियों से किए वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा किया था। वर्ष 2022 में ओपीएस को कर्मचारियों के लिए दिवाली के तोहफे के रूप में पेश किया गया, लेकिन करीब चार वर्ष बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ओपीएस और अन्य जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को सरकार से समाधान के बजाय पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक, सफाई कर्मचारी, बिजली निगम, मनरेगा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और विभिन्न विभागों के कर्मचारी ओपीएस, लंबित डीए एरियर, वेतनमान, नियमितीकरण तथा अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

श्री चुघ ने कहा कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा इन मांगों से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष में रहते हुए आप ने कर्मचारियों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार उनके विरोध का सामना कर रही है।उन्होंने कहा कि करीब सात लाख सरकारी एवं विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी और संविदा कर्मचारी इन मुद्दों से प्रभावित हैं। 27 अगस्त के प्रस्तावित महाबंद और व्यापक कर्मचारी विरोध को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। श्री चुघ ने सरकार से टकराव और पुलिस कार्रवाई का रास्ता छोड़कर कर्मचारियों के साथ तत्काल सार्थक बातचीत करने तथा ओपीएस, डीए एरियर, वेतनमान और नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की।

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