मुंबई , सितंबर 23 -- महाराष्ट्र में कल्याण सत्र न्यायालय ने बुधवार को 17 साल पुराने मानहानि मामले में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे , शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और तीन अन्य लोगों को बरी कर दिया।

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट संतोष आगे ने फैसला सुनाते हुए श्री शिंदे और श्री ठाकरे समेत अन्य आरोपियों पूर्व सांसद आनंद परांजपे और कार्यक्रम आयोजक रमाकांत देवलेकर को बरी कर दिया। अदालत ने ठोस सबूतों की कमी का हवाला दिया और बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार किया कि यह मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित था।

यह मामला 2009 के कल्याण लोकसभा चुनाव का है, जब राकांपा उम्मीदवार वसंत डावखरे के खिलाफ आनंद परांजपे के समर्थन में शिवसेना की एक चुनावी रैली के दौरान एक विवादित वीडियो सीडी चलायी गयी थी। इस क्लिप में कथित तौर पर डावखरे को आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था।

श्री डावखरे की शिकायत के बाद, कोलसेवाड़ी पुलिस थाने में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज किया गया था। लंबे समय तक चले इस मुकदमे के दौरान अदालत ने 20 से ज़्यादा गवाहों के बयान दर्ज किये। श्री ठाकरे और श्री शिंदे सहित प्रमुख राजनीतिक नेताओं के बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए दर्ज किये गये थे। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिये कि आरोप पूरी तरह से झूठे थे और आरोपियों से कानूनी रूप से जुड़े नहीं थे।

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