रांची , अप्रैल 24 -- झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की छवि को नुकसान पहुंचाने, दुर्भावनापूर्ण मीडिया ट्रायल चलाने तथा सांप्रदायिक संकेतों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के गंभीर आरोपों को लेकर "फॉलो अप झारखंड" के खिलाफ कड़ा कानूनी कदम उठाया गया है।

मंत्री डॉ. अंसारी की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने 23 अप्रैल 2026 को एक फाइनल एवं बाइंडिंग लीगल नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में संबंधित मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित एवं प्रसारित सामग्री को पूर्व-नियोजित, दुर्भावनापूर्ण एवं चरित्र-हनन करने वाला बताया गया है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि उक्त सामग्री न केवल पत्रकारिता की मर्यादाओं का उल्लंघन करती है, बल्कि एकतरफा "मीडिया ट्रायल" के माध्यम से जनमानस में भ्रामक एवं गलत धारणा बनाने का प्रयास भी करती है। साथ ही, प्रयुक्त भाषा एवं प्रस्तुति को सांप्रदायिक संकेतों से युक्त बताते हुए इसे सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला करार दिया गया है।

कानूनी नोटिस के अनुसार, यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 (मानहानि) के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही, सिविल टॉर्ट के तहत भी भारी क्षतिपूर्ति का दावा बनता है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस दुर्भावनापूर्ण कंटेंट के कारण मंत्री की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है, उन्हें मानसिक पीड़ा एवं सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा है, जो उनके संवैधानिक अधिकार-अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार)-का उल्लंघन है।

नोटिस में प्रमुख मांगें: सभी प्लेटफॉर्म से विवादित कंटेंट को तत्काल हटाया जाए। डॉ. इरफान अंसारी से सार्वजनिक एवं बिना शर्त माफी मांगी जाए। अन्यथा Rs.10 करोड़ (दस करोड़ रुपये) का हर्जाना अदा किया जाए। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में संबंधित मीडिया संस्था के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी।

डॉ. अंसारी ने कहा है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूर्ण सम्मान करते हैं, किंतु स्वतंत्रता के नाम पर झूठ, अपमान और समाज को बांटने की कोशिश को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ यूट्यूब चैनल, विशेषकर बिहार से संचालित, लगातार झारखंड के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों की छवि को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्होंने न्यायालय से यह प्रश्न उठाया है कि ऐसे प्रयासों के पीछे किसका प्रभाव एवं आर्थिक सहयोग कार्य कर रहा है।

डॉ. अंसारी ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उनकी एवं राज्य सरकार की छवि को धूमिल करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, मंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि ऐसे मीडिया चैनलों को प्रदान की जा रही सरकारी विज्ञापन राशि पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा जनसंपर्क विभाग (Pपीआरडी) में उनका पंजीकरण भी रद्द किया जाए।

अंत में, डॉ. अंसारी ने कहा कि सरकार एवं जनप्रतिनिधियों की छवि को संगठित रूप से नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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